आजमगढ़। सेल्स प्रमोशन कर्मचारियों (SPEs) की विभिन्न समस्याओं को लेकर उत्तर प्रदेश मेडिकल सेल्स रिप्रेजेंटेटिव एसोसिएशन (UPMSRA) ने प्रधानमंत्री के नाम जिलाधिकारी आजमगढ़ के माध्यम से एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कर्मचारियों के उत्पीड़न, अवैध स्थानांतरण, वेतन भुगतान में अनियमितता तथा श्रम कानूनों के उल्लंघन जैसे गंभीर मुद्दों को उठाया गया है।
संघ के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि नियोक्ता बिक्री संवर्धन कर्मचारी (सेवा की शर्तें) अधिनियम, 1976 सहित अन्य श्रम कानूनों का उल्लंघन कर रहे हैं। कर्मचारियों को अवैध रूप से नौकरी से निकाला जा रहा है, फर्जी आरोप लगाकर परेशान किया जा रहा है तथा यूनियन गतिविधियों को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
ज्ञापन में 20 सूत्रीय मांगें रखी गई हैं, जिनमें प्रमुख रूप से चार श्रम संहिताओं को निरस्त करने, न्यूनतम वेतन ₹26,910 प्रतिमाह घोषित करने, ईपीएस पेंशन ₹9,000 प्रतिमाह सुनिश्चित करने, 8 घंटे का कार्यदिवस लागू करने तथा श्रम कानूनों का सख्ती से पालन कराने की मांग शामिल है। इसके अलावा दवाओं और चिकित्सा उपकरणों पर जीएसटी शून्य करने, आवश्यक दवाओं की कीमतों पर नियंत्रण लगाने और स्वास्थ्य क्षेत्र में जीडीपी का 5 प्रतिशत बजट आवंटित करने की भी मांग की गई है।
संघ ने यह भी मांग की है कि मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव के कार्य को आपराधिक कृत्य न माना जाए तथा अस्पतालों में उनके काम पर लगाए गए प्रतिबंध को वापस लिया जाए। साथ ही दवाओं की ऑनलाइन बिक्री पर रोक लगाने और कॉर्पोरेट भ्रष्टाचार रोकने हेतु वैधानिक विपणन संहिता लागू करने की मांग की गई है।
UPMSRA के अध्यक्ष प्रशांत सिंह और सचिव नूर आलम ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप कर कर्मचारियों को न्याय दिलाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यदि मांगों पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई तो संगठन आगे आंदोलन की रणनीति पर विचार करेगा।

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