कानपुर। कानपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षक छह महीने से जेब से एमडीएम खिला रहे हैं. यही हाल उन एजेंसियों का भी है जिनकी जिम्मेदारी एमडीएम परोसना है. छह महीने से फल के लिए भी धनराशि नहीं दी गई है. शिक्षकों ने खंड शिक्षा अधिकारियों से कह दिया है कि इन परिस्थितियों में वे एमडीएम खिलाने में अत्याधिक परेशानियों का सामना करने को मजबूर हैं. अब प्रधान भी साथ नहीं दे रहे हैं. दरअसल, स्कूलों को सात महीने से कन्वर्जन कॉस्ट और रसोइयों को मानदेय नहीं मिलने का मामला गरमाया तो 2.18 करोड़ की राशि मिल पाई. अहम बात है कि मध्याह्न भोजन प्राधिकरण से बीएसए कार्यालय ने 28 करोड़ रुपये की मांग की थी लेकिन मिला ऊंट के मुंह में जीरा. कन्वर्जन कॉस्ट के 1.44 करोड़ और रसोइयों का एक माह का मानदेय 74 लाख 66 हजार रुपये ही मिल सके.
बीएसए ने एमडीएम प्राधिकरण को पत्र भेजकर सत्र 2022-23 के प्रथम और द्वितीय त्रैमास के लिए परिवर्तन लागत, रसोइया मानदेय और फल वितरण की धनराशि मांगी थी. परिवर्तन लागत के रूप में 2144.71 लाख और रसोइया के मानदेय के रूप में 753.14 लाख (कुल 28 करोड़ 97 लाख 85 हजार रुपये) बकाया की डिमांड की गई थी. दोनों मदों में कुल दो करोड़ 18 लाख 66 हजार रुपये ही मिल सके हैं. शहर में 3733 रसोइये हैं. फल के मद में शहर को एक रुपया नहीं दिया गया है. पिछले छह माह से शिक्षक अपनी जेब से बच्चों को फल खिला रहे हैं. प्रति बच्चा इस मद में चार रुपया प्रति छात्र दिया जाता है. महीने में पांच बार फल बांटे जाते हैं.
विभागीय सूत्रों के अनुसार एमडीएम की योजना केंद्र और राज्य के सहयोग से चलती है. केंद्र से एमडीएम के बजट में मिलने वाली धनराशि न आने से राज्य को ही अपने स्तर से धन देना पड़ रहा है. बीएसए सुरजीत कुमार सिंह का कहना है कि एमडीएम की परिवर्तन कॉस्ट की जो भी डिमांड थी उसे प्राधिकरण को भेज दिया गया है. अब धनराशि आनी शुरू हुई है. एक माह की कन्वर्जन कॉस्ट और एक माह का रसोइयों का मानदेय आ गया है. इसे स्कूलों को दिया जा रहा है. बाकी जल्द ही आने की संभावना है.

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