नाम न लिए जाने से नाराजगी की चर्चा; संगठन की अंदरूनी खींचतान फिर सतह पर
आजमगढ़। भारतीय जनता पार्टी खुद को अनुशासन, संगठन और कार्यकर्ता आधारित राजनीति की पार्टी बताती है। लेकिन आजमगढ़ में पार्टी की एक समीक्षा बैठक के दौरान सामने आए कथित विवाद के वीडियो ने इसी दावे पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन से जुड़े संकल्प यात्रा कार्यक्रम की समीक्षा के लिए आयोजित बैठक में भाजपा नेताओं के बीच कथित कहासुनी और हाथापाई की स्थिति का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। खास बात यह है कि घटनाक्रम के समय पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष और आजमगढ़ के जिला प्रभारी डॉ. धर्मेंद्र सिंह भी मौजूद बताए जा रहे हैं।
मामला महज दो नेताओं के बीच तकरार का है या इसके पीछे संगठन के भीतर चल रही किसी गहरी खींचतान की झलक है, इसे लेकर पार्टी के अंदर और बाहर चर्चा तेज हो गई है। वायरल वीडियो ने इस चर्चा को और हवा दे दी है।
संबोधन में नाम छूटा तो गरमाया माहौल
पार्टी सूत्रों के अनुसार, बैठक में जिला अध्यक्ष ध्रुव सिंह ने अपने संबोधन के दौरान कई वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों का नाम लेकर उनका उल्लेख किया। इसी दौरान भाजपा नेता ज्ञानू सिंह का नाम नहीं लिए जाने को लेकर कथित तौर पर नाराजगी सामने आई। इसके बाद ज्ञानू सिंह और जिला अध्यक्ष के बीच कहासुनी शुरू होने की बात कही जा रही है।
देखते ही देखते स्थिति इतनी बिगड़ी कि दोनों नेताओं के बीच धक्का-मुक्की अथवा हाथापाई जैसी स्थिति बन गई। मौके पर मौजूद पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने बीच-बचाव किया। प्रदेश उपाध्यक्ष एवं जिला प्रभारी डॉ. धर्मेंद्र सिंह ने भी हस्तक्षेप कर स्थिति को शांत कराने का प्रयास किया।
घटना के दौरान किसी व्यक्ति द्वारा बनाए गए वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला बैठक कक्ष से निकलकर सार्वजनिक बहस का विषय बन गया है।
‘नाम’ का विवाद या सम्मान की सियासत?
राजनीति में मंच से किसी नेता का नाम लेना या छोड़ देना सामान्य औपचारिकता लग सकती है, लेकिन संगठन के भीतर इसका राजनीतिक अर्थ निकाला जाता है। खासकर तब, जब संबंधित नेता लंबे समय से सक्रिय हो और स्थानीय राजनीति में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहा हो।
ज्ञानू सिंह को लेकर पार्टी के भीतर उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि और विभिन्न राजनीतिक दलों में सक्रिय रहने को लेकर चर्चाएं भी होती रही हैं। ऐसे में बैठक में उनका नाम नहीं लिए जाने को कुछ लोग महज संयोग मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे संगठन के भीतर स्वीकार्यता और वर्चस्व से जोड़कर देख रहे हैं।
यही वजह है कि विवाद अब केवल उस बैठक तक सीमित नहीं रह गया है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या आजमगढ़ भाजपा में पुराने और नए राजनीतिक समीकरणों के बीच खींचतान बढ़ रही है?
जिला प्रभारी के सामने विवाद ने बढ़ाई बेचैनी
घटना का सबसे संवेदनशील पहलू यह है कि जिस समय विवाद हुआ, उस समय प्रदेश स्तर के वरिष्ठ पदाधिकारी और जिले के प्रभारी डॉ. धर्मेंद्र सिंह बैठक में मौजूद थे। पार्टी के जिला प्रभारी की मौजूदगी में नेताओं के बीच इस तरह का घटनाक्रम होना संगठन के लिए निश्चित रूप से असहज स्थिति पैदा करता है।
भाजपा का संगठनात्मक ढांचा अनुशासन और शीर्ष नेतृत्व के निर्देशों के पालन पर जोर देता है। ऐसे में समीक्षा बैठक, जहां कार्यकर्ताओं को आगामी कार्यक्रमों और संगठन की रणनीति पर चर्चा करनी थी, वहीं व्यक्तिगत नाराजगी सार्वजनिक विवाद में बदल जाए तो इससे कार्यकर्ताओं के बीच क्या संदेश जाता है, यह बड़ा सवाल है।
वीडियो ने बढ़ाई राजनीतिक चर्चा
वायरल वीडियो ने घटना को और महत्वपूर्ण बना दिया है। सोशल मीडिया के दौर में बंद कमरे की बैठक का विवाद अब कुछ ही घंटों में हजारों लोगों तक पहुंच सकता है। भाजपा के विरोधी दलों को भी इस वीडियो के जरिए संगठन पर सवाल उठाने का अवसर मिल सकता है।
हालांकि, वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि विवाद की वास्तविक शुरुआत किस बात से हुई और वीडियो में दिखाई दे रहे घटनाक्रम से पहले क्या हुआ था। इसलिए पूरे मामले को केवल वायरल वीडियो के आधार पर अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचाना जल्दबाजी होगी।
फिर भी राजनीतिक संदेश साफ है—संगठन के भीतर मतभेद हों तो उनका समाधान संगठनात्मक मंच पर होना चाहिए, न कि सार्वजनिक विवाद और वायरल वीडियो के जरिए।
चुनावी तैयारी के बीच उठे सवाल
आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा आजमगढ़ में संगठन को सक्रिय करने में जुटी है। बूथ स्तर तक कार्यक्रम, सदस्यता, संपर्क और अभियानों को गति देने की कवायद चल रही है। ऐसे समय में वरिष्ठ नेताओं के बीच सार्वजनिक विवाद की चर्चा संगठन के लिए चिंता का विषय बन सकती है।
अब असली परीक्षा भाजपा नेतृत्व की है। क्या पार्टी इस घटनाक्रम को सामान्य कहकर आगे बढ़ जाएगी या वायरल वीडियो का संज्ञान लेकर पूरे मामले की पड़ताल करेगी? क्या संबंधित नेताओं के बीच मतभेद दूर करने के लिए संगठन हस्तक्षेप करेगा? और सबसे बड़ा सवाल—क्या आजमगढ़ भाजपा में सब कुछ उतना ही सहज है, जितना मंच से दिखाई देता है?
फिलहाल पार्टी की ओर से इस घटनाक्रम पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। लेकिन वायरल वीडियो ने इतना जरूर स्पष्ट कर दिया है कि आजमगढ़ भाजपा के भीतर चल रही राजनीतिक हलचल अब बंद कमरों तक सीमित नहीं रही।

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