पत्नी-बेटे और दो पुरोहितों की हत्या के बाद आरोपी का एनकाउंटर!
आजमगढ़। अहरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गहजी गांव में मंगलवार को हुए खूनी घटनाक्रम की कड़ियां वर्ष 2019 में हुए एक हत्या के मामले से जुड़ती नजर आ रही हैं। पूजा-पाठ के दौरान विवाद के बाद अरविंद सिंह ने कथित रूप से अपनी पत्नी समेत तीन लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी। इसके बाद तीन बच्चों को कमरे में बंधक बनाकर खुद को अंदर बंद कर लिया। करीब सात घंटे तक पुलिस उसे आत्मसमर्पण के लिए समझाती रही। बाद में कमरे के भीतर से फायरिंग होने पर पुलिस टीम ने दरवाजा तोड़कर प्रवेश किया। पुलिस के अनुसार, अरविंद ने टीम पर भी गोली चलाई, जिसके जवाब में हुई फायरिंग में वह घायल हो गया। अस्पताल में उसकी मौत हो गई। वहीं, गोली लगने से घायल उसके बेटे शौर्य ने भी उपचार के दौरान दम तोड़ दिया।
2019 में हुई थी सुनील की हत्या
परिवार के सदस्य सूरज सिंह के अनुसार, इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि वर्ष 2019 में तैयार हुई थी। उनके मुताबिक अरविंद के चचेरे भाई मनीष सिंह ने उसके सगे भाई सुनील सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस मामले में मनीष और उसके भाई अवनीश को जेल भेजा गया था।
सूरज सिंह का दावा है कि सुनील को मनीष और अरविंद की पत्नी बबीता के बीच कथित संबंधों की जानकारी हो गई थी। उन्होंने यह भी बताया कि सुनील ने मनीष के खिलाफ चोरी, छिनैती और छेड़खानी समेत करीब 20 मुकदमे दर्ज कराए थे। एक मामले में अदालत ने मनीष और अवनीश को 20 वर्ष की सजा सुनाई थी। बाद में सुनील की हत्या के मामले में भी दोनों को जेल भेजा गया।
परिवार के अनुसार, मनीष और अवनीश करीब डेढ़ माह पहले ही जेल से बाहर आए थे। इसके बाद से परिवार में पुराने विवाद को लेकर तनाव बना हुआ था। हालांकि, पुराने मुकदमों और आरोपों की पूरी स्थिति पुलिस और न्यायालय के अभिलेखों से स्पष्ट होगी।
भाई की आत्मा की शांति के लिए पूजा
परिवार के अनुसार, जेल से रिहाई के बाद घर में शांति के लिए पूजा-पाठ कराने का निर्णय लिया गया। अरविंद की पत्नी बबीता और उसकी मां ने पुजारियों से संपर्क किया। परिवार का कहना है कि पुजारियों ने उन्हें बताया था कि सुनील की आत्मा उन्हें परेशान कर रही है। इसके बाद घर में पूजा शुरू कराई गई।
बताया गया कि सोमवार से पूजा चल रही थी। अरविंद ने पुजारियों को अगले दिन घर नहीं आने की चेतावनी भी दी थी। इसके बावजूद मंगलवार को पूजा जारी रही। पूजा होते देख अरविंद नाराज हो गया और पत्नी से विवाद करने लगा। परिवार के अनुसार, इसी दौरान उसने पुराने घटनाक्रम का जिक्र करते हुए बबीता पर अपने भाई की हत्या से जुड़े विवाद का आरोप लगाया।
विवाद के बाद बरसीं गोलियां
मंगलवार को विवाद बढ़ने के बाद अरविंद ने कथित रूप से फायरिंग शुरू कर दी। गोली लगने से उसकी पत्नी बबीता और पूजा कराने आए दो पुरोहितों की मौत हो गई। घटना से गांव में अफरातफरी मच गई। मौके पर ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। पुलिस ने लोगों को घटनास्थल से दूर किया और इलाके को घेर लिया।
तीन लोगों की हत्या के बाद अरविंद अपने तीन बच्चों को लेकर घर के अंदर चला गया और एक कमरे में खुद को बंद कर लिया। बच्चों के कमरे में होने के कारण पुलिस के सामने चुनौती बेहद गंभीर थी। पुलिस ने तत्काल बल प्रयोग करने के बजाय आरोपी को समझाकर आत्मसमर्पण कराने का प्रयास किया।
सात घंटे तक पुलिस ने की समझाइश
एसपी डॉ. अनिल कुमार के अनुसार, पुलिस टीम ने करीब सात घंटे तक अरविंद से बातचीत की। पुलिस का प्रयास था कि वह आत्मसमर्पण कर दे और बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। इस दौरान परिवार के लोगों को भी मौके पर बुलाकर अरविंद से बात कराने का प्रयास किया गया। काफी देर तक समझाने के बाद भी वह बाहर नहीं आया। इसी बीच कमरे के अंदर से गोली चलने की आवाज सुनाई दी। पुलिस को आशंका हुई कि बच्चों की जान तत्काल खतरे में है। इसके बाद पुलिस ने ऑपरेशन शुरू किया।
पुलिस के अनुसार, दरवाजा तोड़कर टीम कमरे में दाखिल हुई। अंदर पहुंचते ही अरविंद ने पुलिसकर्मियों पर फायरिंग कर दी। उसने लगातार कई राउंड गोलियां चलाईं। बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की। इस दौरान अरविंद को गोली लगी और वह घायल हो गया।
अस्पताल में अरविंद और बेटे की मौत
पुलिस टीम ने घायल अरविंद को तत्काल अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस कार्रवाई के दौरान उसका नौ वर्षीय बेटा शौर्य भी गोली लगने से घायल हुआ था। उसे भी उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस तरह शंभूपुर गांव का घटनाक्रम पत्नी और दो पुरोहितों की हत्या से आगे बढ़कर आरोपी अरविंद की मौत और उसके बेटे शौर्य की मृत्यु तक पहुंच गया। घटना के बाद गांव में तनाव और दहशत का माहौल बना रहा। पुलिस ने घटनास्थल को सुरक्षित कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, फायरिंग में इस्तेमाल हथियार और अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है। परिवार के सदस्यों और प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ कर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं। पुराने हत्या के मामले, जेल से रिहाई और मंगलवार की पूजा के दौरान हुए विवाद के बीच संबंधों की भी जांच की जा रही है। मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच के बाद घटनाक्रम की तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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