पांच मौतों की गुत्थी उलझी: शौर्य की मौत पर पुलिस और परिवार के दावे आमने-सामने...मां और बहन ने पुलिस की गोली लगने का लगाया आरोप, एसपी ने दावे को नकारा!



आजमगढ़। अहरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गहजी गांव में पत्नी और दो पुरोहितों की हत्या के बाद पुलिस मुठभेड़ में मारे गए अरविंद सिंह के आठ वर्षीय बेटे शौर्य की मौत को लेकर अब नया विवाद सामने आया है। शौर्य की मौत पुलिस की गोली से हुई या उसके पिता की गोली से, इसे लेकर परिवार और पुलिस के दावे अलग-अलग हैं। अरविंद की मां श्याम बली देवी और बहन साधना ने आरोप लगाया है कि शौर्य की जान पुलिस की गोली लगने से गई। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं, पुलिस इस आरोप को खारिज कर रही है। परिवार की ओर से श्याम बली देवी और साधना ने शौर्य की मौत को लेकर पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि पुलिस ने कमरे में प्रवेश के दौरान फायरिंग की थी और इसी दौरान शौर्य को गोली लगी। परिवार ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि बच्चे को गोली किसकी तरफ से लगी। यह आरोप ऐसे समय सामने आया है जब पुलिस के अनुसार अरविंद के कमरे में तीन बच्चे मौजूद थे। मंगलवार शाम पत्नी बबीता और दो पुरोहितों की हत्या के बाद अरविंद अपने आठ वर्षीय बेटे शौर्य, नौ वर्षीय बेटी परी और छह माह की बच्ची को लेकर कमरे में बंद हो गया था। पुलिस ने मकान को घेरकर कई घंटे तक उसे आत्मसमर्पण के लिए समझाने का प्रयास किया था।
पुलिस का कहना है कि कमरे के अंदर से गोली चलने की आवाज आने के बाद बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए तत्काल कार्रवाई करनी पड़ी। पुलिस के अनुसार, टीम ने दरवाजा तोड़कर कमरे में प्रवेश किया तो अरविंद ने पुलिसकर्मियों पर फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में अरविंद घायल हुआ। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। पुलिस के अनुसार, इसी घटनाक्रम के दौरान शौर्य भी गोली लगने से घायल हुआ था। उसे उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिस का दावा है कि शौर्य को उसके पिता अरविंद की गोली लगी थी। परिवार के आरोप के विपरीत पुलिस ने बच्चे की मौत के लिए अपनी गोलीबारी को जिम्मेदार मानने से इनकार किया है। शंभूपुर गहजी में मंगलवार शाम पूजा के दौरान पत्नी बबीता और दो पुरोहितों की हत्या के बाद अरविंद बच्चों को लेकर कमरे में बंद हो गया था। सूचना पर पुलिस अधिकारी और कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंची। करीब सात घंटे तक पुलिस ने उससे बातचीत कर आत्मसमर्पण के लिए मनाने का प्रयास किया। बच्चों के कमरे में होने के कारण पुलिस बेहद सतर्कता से कार्रवाई कर रही थी। बाद में कमरे से गोली चलने की आवाज आने पर पुलिस ने दरवाजा तोड़कर प्रवेश किया। पुलिस के अनुसार अंदर पहुंचते ही अरविंद ने टीम पर गोलियां चलाईं, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई की गई। इस कार्रवाई में अरविंद की मौत हो गई। घायल शौर्य को भी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी। पांच मौतों वाले इस मामले में अब शौर्य की मौत को लेकर सामने आए अलग-अलग दावों से जांच का एक और पहलू जुड़ गया है। परिवार निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है, जबकि पुलिस अपने घटनाक्रम पर कायम है। ऐसे में पोस्टमार्टम, चिकित्सकीय रिपोर्ट, घटनास्थल से मिले साक्ष्य और पुलिस जांच से ही शौर्य को लगी गोली की परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी।

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