पूर्व नेता प्रतिपक्ष और पूर्व कैबिनेट मंत्री के निधन से समाजवादी राजनीति के एक लंबे अध्याय का अंत!
बलिया/लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहे समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व नेता प्रतिपक्ष और पूर्व कैबिनेट मंत्री रामगोविंद चौधरी अब हमारे बीच नहीं रहे। 25 सितंबर की रात लखनऊ स्थित एसजीपीजीआई में उनका निधन हो गया। वह 74 वर्ष के थे। उनके निधन की पुष्टि पीजीआई के निदेशक डॉ. आरके धीमान ने की।
रामगोविंद चौधरी का राजनीतिक जीवन केवल एक दल या एक पद तक सीमित नहीं था। बलिया की बांसडीह और चिलकहर विधानसभा सीटों से उन्होंने आठ बार विधानसभा का प्रतिनिधित्व किया। वह समाजवादी पार्टी की सरकारों में मंत्री रहे और 2017 से 2022 के बीच उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी भी निभाई। विधानसभा के रिकॉर्ड के अनुसार उनके नाम 943 प्रश्न और 50 चर्चाएं दर्ज हैं।
उनकी राजनीति की शुरुआत समाजवादी आंदोलन और जेपी आंदोलन के दौर से हुई। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर से उनका वैचारिक प्रभाव और निकटता भी उनके राजनीतिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रही। बाद में मुलायम सिंह यादव के साथ समाजवादी राजनीति में उनकी भूमिका मजबूत होती गई। अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सरकार में भी उन्होंने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं।
राजनीतिक दौर में उन्होंने मंत्री के रूप में जिम्मेदारी निभाई। 2017 के विधानसभा चुनाव के बाद जब वह नेता प्रतिपक्ष बने तो सरकार के सामने विपक्ष की ओर से लगातार सवाल उठाने वालों में वह प्रमुख चेहरा थे। 2022 में बांसडीह से चुनाव हारने के बाद उनका विधानसभा का सक्रिय संसदीय अध्याय समाप्त हुआ, लेकिन सार्वजनिक जीवन में उनकी सक्रियता बनी रही। उस चुनाव में भाजपा-निषाद पार्टी गठबंधन की प्रत्याशी केतकी सिंह ने उन्हें पराजित किया था।
उनके राजनीतिक जीवन में वैचारिक संघर्ष भी रहे और तीखे राजनीतिक बयान भी। उन्होंने विभिन्न अवसरों पर तत्कालीन सरकारों की नीतियों की आलोचना की। 2025 में भी वह राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय दिखाई दिए।
लेकिन किसी नेता के सार्वजनिक जीवन का मूल्यांकन केवल उसके राजनीतिक बयानों से नहीं किया जा सकता। रामगोविंद चौधरी को करीब से जानने वालों के लिए उनकी पहचान एक ऐसे राजनेता की भी रही, जो राजनीतिक विरोध के बावजूद व्यक्तिगत संबंधों की मर्यादा बनारखने में विश्वास रखते थे।
आज जब उत्तर प्रदेश की राजनीति लगातार अधिक प्रतिस्पर्धी और आक्रामक होती जा रही है, ऐसे समय में रामगोविंद चौधरी का जाना एक ऐसी राजनीतिक शैली की स्मृति भी छोड़ गया है जिसमें विचारों का संघर्ष अपनी जगह था और व्यक्तिगत सम्मान अपनी जगह।
उनका निधन समाजवादी पार्टी के लिए निश्चित रूप से एक बड़ी क्षति है। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव समेत विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है।

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