इया जी की अनोखी विदाई : 700 गाड़ियों का काफिला, डीजे और लौंडा नाच के साथ पोते ने निकली दादी की शवयात्रा...



‎पटना। बिहार के भोजपुर जिले से एक अनोखा मामला सामने आया है, जहां एक पोते ने अपनी दादी की अंतिम यात्रा को इस तरह भव्य बना दिया कि पूरे इलाके में इसकी चर्चा होने लगी। शाहपुर प्रखंड में 95 वर्षीय कौशल्या देवी के निधन के बाद उनकी शवयात्रा किसी शादी समारोह से कम नहीं दिखी।
‎बताया जा रहा है कि कौशल्या देवी पिछले तीन वर्षों से कैंसर से पीड़ित थीं। उनके निधन के बाद परिवार ने उनकी अंतिम इच्छा को याद करते हुए धूमधाम से विदाई देने का फैसला किया। उन्होंने कभी कहा था कि जिस तरह वह इस घर में दुल्हन बनकर आई थीं, उसी तरह उनकी अंतिम विदाई भी यादगार होनी चाहिए।
‎इस शवयात्रा में करीब 700 गाड़ियों का काफिला शामिल हुआ, जबकि 3500 से अधिक लोग इसमें शरीक हुए। पूरे आयोजन को भव्य बनाने के लिए डीजे, बैंड-बाजा और लौंडा नाच का भी इंतजाम किया गया। इतना ही नहीं, ड्रोन कैमरे से पूरी यात्रा की रिकॉर्डिंग कराई गई, जिससे यह आयोजन और भी चर्चा का विषय बन गया।
‎शवयात्रा के दौरान सड़कों के किनारे और घरों की छतों पर खड़े लोग इस दृश्य को देखते रह गए। कई लोगों को यह समझ ही नहीं आ रहा था कि यह बारात है या अंतिम यात्रा।
‎परिवार के बड़े पोते रमेश पांडेय ने बताया कि उन्होंने दादी के रूप में परिवार की एक अनमोल विरासत खो दी है, इसलिए उनकी विदाई को यादगार बनाना चाहते थे।
‎कौशल्या देवी के परिवार में दो बेटे और छह पोते हैं। उनके बेटे वृंदावन पांडेय पेशे से वकील हैं, जबकि अन्य पोते विभिन्न व्यवसायों से जुड़े हुए हैं।
‎इस अनोखी शवयात्रा ने जहां लोगों को हैरान किया, वहीं यह सामाजिक चर्चा का विषय भी बन गई है—क्या शोक को इस तरह उत्सव में बदलना सही है या नहीं।

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