बांदा। यूपी के बांदा जिले के बहुचर्चित और दिल दहला देने वाले चित्रकूट बाल यौन शोषण कांड में आज (शुक्रवार) न्याय की बड़ी जीत हुई है। बांदा की विशेष पॉक्सो (POCSO) कोर्ट ने 34 से अधिक मासूम बच्चों के साथ दरिंदगी और अश्लील वीडियो बनाकर बेचने के मामले में दोषी पाए गए सिंचाई विभाग के निलंबित जूनियर इंजीनियर रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को मृत्युदंड (फांसी की सजा) सुनाई है।
विशेष न्यायाधीश प्रदीप कुमार मिश्रा ने इस मामले को ‘दुर्लभ से दुर्लभतम’ श्रेणी में रखते हुए आदेश दिया कि दोनों दोषियों को मरते दम तक फांसी के फंदे पर लटकाया जाए। सीबीआई दिल्ली द्वारा अक्टूबर 2020 को रिपोर्ट दर्ज की गई, जिसमें अभियुक्त राम भवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को अभियुक्त बनाया गया।
अभियोजन की ओर से सीबीआई से विशेष अभियोजक धारा सिंह ने मुकदमे की पैरवी की, जिसमें बताया कि अभियुक्त थाना नरैनी का निवासी है और चित्रकूट में किराए के घर में रहकर करीब 33 नाबालिग बच्चों के यौन शोषण कर वीडियो बना कर विदेश में भेजे गए। जांच में पता चला कि इसने करीब 2 लाख से ज्यादा वीडियो बना कर भेजे। मुकदमे में कुल 74 गवाह अदालत में पेश किए गए। अभियुक्तों को दोषी पाते हुए न्यायालय द्वारा दोनों को मृत्युदंड की सजा सुनाई और अपने फैसले में कहा कि दोषियों को तब तक फांसी पर लटकाया जाए, जब तक उनकी मृत्यु न हो जाए। यह फैसला देश में नाबालिगों के खिलाफ होने वाले अपराधों पर कड़ा संदेश माना जा रहा है।
अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपियों ने कई वर्षों तक नाबालिग बच्चों को बहला-फुसलाकर और धमकाकर उनका शारीरिक व मानसिक शोषण किया। पीड़ितों की उम्र 3 वर्ष से 18 वर्ष से कम के बीच बताई गई। मामले की जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने बच्चों के आपत्तिजनक वीडियो और तस्वीरें बनाईं, जिन्हें देश से बाहर करीब 47 देशों में भेजा गया था। जिनका इस्तेमाल ब्लैकमेलिंग और अन्य आपराधिक गतिविधियों के लिए किया गया। यह जानकारी स्थानीय अभियोजक सौरभ सिंह ने दी।

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