आडंबर नहीं, मन की पवित्रता से होते हैं प्रभु के दर्शन...आचार्य शांतनु के कथा वाचन में उमड़ा आस्था का सैलाब!



आजमगढ़। शहर के एस.के.पी. इंटर कॉलेज, पाण्डेय बाजार में रामायणम परिवार द्वारा आयोजित सात दिवसीय श्रीराम कथा के तीसरे दिन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा व्यास आचार्य शांतनु जी महाराज ने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जीवन, आदर्शों और चरित्र का भावपूर्ण वर्णन करते हुए कहा कि प्रभु के दर्शन के लिए किसी आडंबर की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि मन की पवित्रता ही सबसे बड़ा माध्यम है। आचार्य शांतनु जी महाराज ने कहा कि भगवान श्रीराम के जन्म से ही अयोध्या का कण-कण धन्य हो गया था। अयोध्या के नर-नारी ने अपने आचरण से यह सिद्ध कर दिया कि सच्ची भक्ति दिखावे से नहीं, बल्कि शुद्ध हृदय और सद्कर्मों से होती है। उन्होंने कहा, “संसार मनुष्य के दोष देखता है, लेकिन परमात्मा उसके गुणों को देखता है। प्रभु अपने भक्तों के अच्छे कर्मों को सदा स्मरण रखते हैं।”
कथा के दौरान जैसे-जैसे श्रीराम के आदर्शों, त्याग, मर्यादा और करुणा का वर्णन आगे बढ़ा, वैसे-वैसे पंडाल में मौजूद श्रोता भाव-विभोर होते चले गए। भक्ति संगीत और मंत्रोच्चार के बीच पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा। आयोजकों ने बताया कि इस सात दिवसीय श्रीराम कथा का उद्देश्य समाज में धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना को सशक्त करना है। साथ ही यह आयोजन नैतिक मूल्यों, पारिवारिक संस्कारों और सामाजिक समरसता को मजबूत करने की दिशा में भी एक सार्थक प्रयास है।

कार्यक्रम के मुख्य यजमान राणा प्रताप राय ‘सोनू’ जी एवं तारा राय जी रहे। इस अवसर पर अनिल सिंह आईपीएस, डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर, डॉ. पवन कुमार, स्वतंत्र सिंह मुन्ना, जिला संघ चालक कामेश्वर सिंह, संदीप सिंह, दिनेश सिंह, दीपक सिंह, सुभाष चंद सिंह, आदित्य सिंह, अनिल सिंह, नितिन सिंह, कुंवर गजेंद्र, मनु राय, सौरभ सिंह, गौरव रघुवंशी एवं राघवेंद्र मिश्रा सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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