आजमगढ़। आईकॉनिक स्कूल ऑफ आज़मगढ़ वेदांता इंटरनेशनल स्कूल में 77वें गणतंत्र दिवस का आयोजन अत्यंत गरिमामय एवं राष्ट्रभक्ति के वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ उप जिलाधिकारी श्याम प्रताप सिंह, विद्यालय के संरक्षक अरविंद कुमार सिंह, प्रबंध निदेशक शिव गोविंद सिंह तथा प्रधानाचार्या सावरी मुखर्जी द्वारा संयुक्त रूप से ध्वजारोहण कर किया गया। ध्वजारोहण के पश्चात माँ सरस्वती की विधिवत पूजा-अर्चना की गई तथा शहीदों के चित्रों पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इसके उपरांत विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने समूचे वातावरण को देशभक्ति और राष्ट्रभावना से ओतप्रोत कर दिया।
विद्यार्थियों ने “सारे जहाँ से अच्छा”, “वंदे मातरम्”, आर्मी थीम सॉन्ग, “चक दे इंडिया” सहित अनेक देशभक्ति से भरपूर प्रस्तुतियाँ दीं, जिन्हें उपस्थित जनसमूह ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ सराहा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उप जिलाधिकारी श्याम प्रताप सिंह ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के मन में सदैव प्रश्न और जिज्ञासा बनी रहनी चाहिए, क्योंकि यही जिज्ञासा उन्हें नवाचार, खोज और प्रगति की ओर अग्रसर करती है।
कार्यक्रम का कुशल संचालन हर्ष यादव एवं यशा जावेद द्वारा किया गया। इस अवसर पर धर्मराज यादव (चौकी इंचार्ज), आनंद यादव, बृजेंद्र पांडे, आकाश सिंह, शिवम सिंह, भगवान सिंह सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति एवं अभिभावकगण उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में मुख्य अतिथि श्याम प्रताप सिंह को विद्यालय के संरक्षक अरविंद कुमार सिंह एवं प्रबंध निदेशक शिव गोविंद सिंह द्वारा बुके एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया।
प्रधानाचार्या सावरी मुखर्जी ने उपस्थित अभिभावकों का विद्यालय पर विश्वास जताने के लिए आभार व्यक्त किया तथा आगामी सत्र में और अधिक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं संस्कार प्रदान करने का संकल्प दोहराया। समापन अवसर पर प्रबंध निदेशक शिव गोविंद सिंह ने सभी अतिथियों, अभिभावकों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि सभी के सहयोग और विश्वास से संस्था निरंतर अपने शैक्षिक उद्देश्यों को सफलतापूर्वक प्राप्त कर रही है। कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रधानाचार्या सावरी मुखर्जी के नेतृत्व में समस्त शिक्षकों एवं शिक्षिकाओं का विशेष योगदान रहा, जिससे यह आयोजन अत्यंत सफल एवं स्मरणीय बन सका।

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