वाराणसी। इस वर्ष चंद्रग्रहण के चलते काशी में होली के पर्व की तिथियों और समय में बदलाव किया गया है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार होलिका दहन आधी रात के बाद किया जाएगा, जबकि रंगों का मुख्य पर्व होली देशभर में 4 मार्च को मनाया जाएगा। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभागाध्यक्ष प्रो. अमित कुमार शुक्ल ने बताया कि होलिका दहन 2 मार्च की रात 3 बजकर 24 मिनट के बाद भद्रा काल में किया जा सकता है। वहीं भद्रा पूर्ण समाप्त होने के बाद सुबह 5 बजकर 33 मिनट से भद्रारहित काल में भी दहन संभव होगा। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार यह तिथि 3 मार्च में प्रवेश कर जाएगी।
उन्होंने बताया कि 3 मार्च को चंद्रग्रहण होने के कारण दिन में होली खेलना वर्जित रहेगा। दोपहर 12 बजे से लेकर शाम 6 बजकर 47 मिनट तक रंग-गुलाल लगाने और खान-पान पर रोक रहेगी। ग्रहण समाप्त होने और स्नान के बाद ही पुनः अबीर-गुलाल खेला जा सकेगा। बीएचयू के पंचांग के अनुसार 3 मार्च को होली नहीं मनाई जाएगी और पूरे देश के साथ 4 मार्च को ही रंगों का पर्व मनाया जाएगा। हालांकि, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय की गणना के अनुसार काशीवासी ग्रहण काल को छोड़कर 3 मार्च को भी होली खेल सकते हैं।
धार्मिक दृष्टि से इस वर्ष कई शुभ संयोग भी बन रहे हैं। प्रो. शुक्ल ने बताया कि होलाष्टक 24 फरवरी से प्रारंभ होगा। वहीं 27 फरवरी को रंगभरी एकादशी के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग का दुर्लभ संयोग बनेगा, जिसे अत्यंत शुभ माना जा रहा है। इसके अलावा काशी की प्रसिद्ध परंपरा मसान की होली इस वर्ष 28 फरवरी को मणिकर्णिका घाट पर खेली जाएगी। आयोजक गुलशन कपूर ने बताया कि आयोजन स्थल की तैयारी की जा रही है और परंपरा के अनुसार तय स्थान पर ही मसान की होली संपन्न होगी। इस प्रकार चंद्रग्रहण के कारण इस वर्ष काशी में होली का उत्सव विशेष ज्योतिषीय नियमों और परंपराओं के साथ मनाया जाएगा।

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