आपके केस में बड़ी गड़बड़ी है, पैसे भेज दो वरना मुश्किल बढ़ जाएगी... आजमगढ़ में कथित दो पुलिसकर्मी ठगी के आरोप में गिरफ्तार!



आज़मगढ़। तेजी से बदलती आपराधिक तकनीकों के बीच आज़मगढ़ पुलिस ने एक ऐसे साइबर गिरोह का पर्दाफाश किया है जो सरकारी ऐप से डाउनलोड की गई थ्प्त् और डिजिटल डेटा को हथियार बनाकर लोगों से ठगी कर रहा था। पुलिस की इस कार्रवाई ने न केवल एक नए मॉडस ऑपरेंडी को उजागर किया है, बल्कि साइबर अपराधों की भयावहता पर भी सवाल खड़े किए हैं।
जांच में सामने आया कि गिरफ्तार अपराधी UPCOP मोबाइल ऐप के जरिए एफआईआर डाउनलोड कर पीड़ितों के नाम-पते जैसी संवेदनशील जानकारी हासिल कर लेते थे। फिर गूगल और निर्वाचन आयोग की वेबसाइट से गांव के प्रधान का नंबर खोजकर पीड़ित का मोबाइल नंबर निकालते थे। इसके बाद शुरू होता था फोन पर धमकी और डराने का खेल।
आरोपी खुद को पुलिसकर्मी बताकर कहते कि “आपके केस में बड़ी गड़बड़ है.. अभी कार्रवाई हो सकती है, पैसे भेज दो वरना मुश्किल बढ़ जाएगी” और जैसे ही पीड़ित डरकर फत् कोड पर रकम भेजता, आरोपियों का फोन हमेशा के लिए बंद। गिरफ्तारी की यह कार्रवाई 25 नवंबर 2025 को दर्ज हुई एक शिकायत से शुरू हुई। मेहनगर क्षेत्र की एक महिला, सविता, को फोन कर बताया गया। “आपकी बेटी मिल गई है, उसे लाने जा रहे हैं, जल्दी 24 हजार रुपये भेजो।” घबराहट में महिला ने 22 हजार रुपये क्यूआर कोड पर भेज दिए। इसके बाद फोन बंद, और कोई सूचना नहीं। थाना जहानागंज में मामला दर्ज किया गया।
मुखबिर से सूचना मिलने पर थानाध्यक्ष अतुल कुमार मिश्रा व साइबर सेल की टीम नेे आज़मगढ़ रेलवे स्टेशन के पूर्वी छोर से दो संदिग्धों को पकड़ा। गिरफ्तार आरोपी मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ के निवासी निकले। पूछताछ में अपना नाम अंकित यादव (24), व दीनदयाल यादव बताया। पुलिस के अनुसार, दोनों कई राज्यों में फैले साइबर नेटवर्क से जुड़े बताए जा रहे हैं। पुलिस ने उनके पास से दो रियलमी मोबाइल, एक फर्जी पुलिस आईडी, चार फर्जी आधार कार्ड व टूटा-फूटा जिओ और एयरटेल सिम बरामद किया। यह बरामदगी साफ बताती है कि गिरोह लंबे समय से पहचान बदलकर साइबर ठगी कर रहा था। रिकॉर्ड के अनुसार आरोपी भदोही साइबर पुलिस स्टेशन में दर्ज मु0अ0सं. 48/2025 के मामले में भी वांछित थे। पकड़ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली पुलिस टीम में थाना जहानागंज थानाध्यक्ष अतुल कुमार मिश्रा, उपनिरीक्षक विनय कुमार, का. शिवम चौधरी, हरेन्द्र सिंह, वाहन चालक का. राशिद ख़ाँ साइबर सेल उपनिरीक्षक सागर कुमार रंगू, हे.का. ओमप्रकाश जायसवाल, हे.का. मुकेश भारती, आरक्षी राहुल सिंह, आरक्षी सतेंद्र यादव, आरक्षी श्याम कुमार साहनी शामिल रहे।
पुलिस अधिकारियों ने कहा कि यह केस बताता है कि किस तरह सार्वजनिक डिजिटल डेटा अपराधियों के लिए अवसर बन गया है। लोगों से अपील करते हुए अपर पुलिस अधीक्षक ने कहा कि अनजान नंबरों से आने वाली कॉल, पुलिस बनकर पैसे मांगने वाले संदेश, क्यूआर कोड से भुगतान की मांग पर तुरंत पुलिस को सूचित करें और किसी भी परिस्थिति में घबराकर ट्रांजैक्शन न करें।

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