पत्रकार राघवेन्द्र बाजपेई हत्याकांड में पुलिस के हाथ लगे अहम सुराग...जल्द हो सकता है खुलासा!


लखनऊ। प्रदेश के सीतापुर में पत्रकार राघवेन्द्र बाजपेई हत्याकांड में पुलिस को अहम सुराग हाथ लगे हैं। पुलिस जल्द ही इस जघन्यतम हत्याकांड का खुलासा कर सकती है। पुलिस अधीक्षक चक्रेश मिश्र ने ऑफ द रिकॉर्ड बताया कि मंगलवार को इसे लेकर कोई बड़ा खुलासा किया जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक पुलिस ने कई एंगल को लेकर 50 घंटे तक जांच पड़ताल की। दो दर्जन से ज्यादा लोगों से पूछताछ और मृतक पत्रकार के मोबाइल से बहुत सारे राज पुलिस के हाथ लगे है।
पुलिस को मृतक पत्रकार के मोबाइल की रिकॉर्डिंग से कई एंगल पर जांच पड़ताल कर आगे बढ़ाना पड़ा। हालांकि इस मामले में एसटीएफ ने भी जांच पड़ताल शुरू कर दी है। सोमवार को एसटीएफ की टीम सीतापुर पहुंची और टेलीफोन टावर के डम्प नेटवर्क को साथ ले गई। पुलिस को अभी तक जियो का डाटा नहीं मिल पाया है। इस मामले में धान खरीद और जमीन खरीद घोटाले के अलावा महिला का भी एंगल भी सामने आया है। पुलिस अधिकारियों की माने तो पत्रकार राघवेन्द्र बाजपेई के मोबाइल से उन्हें कई कॉल रिकॉर्डिंग भी मिली हैं।
बता दें कि 8 मार्च को लखनऊ-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर थाना इमलिया सुल्तानपुर इलाके के हेमपुर रेलवे ओवरब्रिज पर दिनदहाड़े पत्रकार राघवेन्द्र बाजपेई की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गयी थी। राघवेन्द्र बाजपेई के पास तहसीलदार का फोन आया था। वह घर महोली से सीतापुर के लिए बाइक से निकले थे। 9 किलोमीटर पहुंचे थे कि पीछा कर रहे असलहाधारी हमलावरों ने उन्हें गोलियों से भून दिया था। राघवेन्द्र बाजपेई को 315 बोर की चार गोलियां मारी गयी थी। घटना को अंजाम दे हमलावर मौके से फरार हो जाने में सफल रहे थे। मृतक की पत्नी की ओर से अज्ञात हमलावरों के विरूद्ध घटना को अंजाम देने का मुकदमा महोली कोतवाली में दर्ज कराया गया। मृतक की पत्नी के मुताबिक रेकी कर सुनियोजित तरीके से हत्याकांड को अंजाम दिया गया। परिजनों के मुताबिक भ्रष्टाचार की खबर प्रकाशित करने पर उन्हें धमकियां दी जा रही थी।
इस मामले पर सियासत भी तेज हो गई है। विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने योगी सरकार पर हमला बोला तो वहीं इस हत्याकांड से आहत व्यापारी, वकील, सामाजिक संगठन और पत्रकार संगठन सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। पुलिस ने जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल फोन लोकेशन को खंगाला, जिसमें उरदौली से बाइक सवार दो संदिग्ध हमलावर पीछा करते भी देखे गए। जिनकी हेमपुर रेलवे ओवरब्रिज के आगे कोई लोकेशन नहीं मिली। जबकि एक थार गाड़ी सीतापुर की तरफ भी जाते दिखाई दी है। पुलिस को शक है कि हत्या में शूटरों का इस्तेमाल किया गया है। इस हत्याकांड ने धान खरीद घोटाले से लेकर लेखपालों के बीच आपसी गुटबाजी और जमीन खरीद घोटाले को भी सामने ला दिया है। यही कारण है कि पुलिस हिरासत में चार लेखपाल, पूर्व सैनिक समेत 20 के करीब लोगों से पूछताछ की जा रही है। पड़ोसी जनपद लखीमपुर खीरी की महिला भी थाने बुलायी गयी है और उसके करीबियों को भी हिरासत में लिया गया है।

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