आजमगढ़ः सिर्फ 30 मिनट सुबह करें व्यायाम तो BP रहेगी नियंत्रितः डा. अमित श्रीवास्तव


शरद गुप्ता

आजमगढ़। नेशनल इंटीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन (नीमा) एपेक्स हॉस्पिटल वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान में हृदय रोग, अस्थि रोग, मधुमेह रोग, कैंसर रोग तथा नाक-कान-गला रोग विषय पर चिकित्सीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी को सर्वप्रथम वाराणसी के एमसीएच कार्डियोथोरेसिक डॉ. अमित श्रीवास्तव ने संबोधित करते हुए उच्च रक्तचाप में जल्दी और उचित चिकित्सा पर विस्तृत जानकारी दी और उससे बचाव तथा रोकथाम की व्याख्या करते हुए कहा कि बहुत से लोगों को मालूम ही नहीं होता है कि उन्हें बी.पी. की समस्या है। मोटापा होना, डायबिटीज, अनियमित दिनचर्या, दूषित आहार विहार और तनाव आदि उच्च रक्तचाप के सामान्य कारण हैं। ऐसे लोगों को जिनकी उम्र 40 वर्ष से ऊपर है, उन्हें 2-3 माह के नियमित अंतराल पर अपना बी.पी. अवश्य जाँच कराना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय तक बी.पी. की समस्या रहती है तो उसे कई सारे खतरे हो सकते हैं। उनकी आंखों को, दिमाग को, किडनी को और हृदय को प्रभावित कर सकता है। इसके निवारण के लिए बी.पी. को नियंत्रित रखना चाहिए, सामान्य जीवनचर्या का पालन करना चाहिए, बीड़ी, सिगरेट, तम्बाकू, अल्कोहल आदि का सेवन नहीं करना चाहिए, रोज सुबह कम से कम 30 मिनट तक व्यायाम अवश्य करना चाहिए, तनाव से दूर रहना चाहिए। किसी भी तरह की परेशानी होने पर योग्य चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।

मधुमेह या डायबिटीज पर बोलते हुए डॉ. अलंकार तिवारी ने लोगों से अपने आहार विहार को नियंत्रित करने को कहा। उन्होंने कहा कि डायबिटीज अनियमित दिनचर्या, बाहरी खाद्य पदार्थों का सेवन, शारीरिक श्रम न करना आदि कारणों से होता है। अतः नियमित व्यायाम और स्वस्थ आहार विहार का पालन करके हम इससे बच सकते हैं। इसके साथ ही अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ अमित कुमार झा ने घुटने में होने वाले दर्द की चिकित्सा और बचाव पर व्याख्यान दिया। नाक-कान-गला रोग विशेषज्ञ डॉ हर्ष सिंह ने इनकी सामान्य बीमारी और उससे बचाव के उपाय बताए।

कैंसर विशेषज्ञ डॉ दीपक कुमार सिंह ने वर्तमान समय में बढ़ते हुए कैंसर रोगियों के प्रति चिंता व्यक्त की और आज के वातावरण और खानपान को उसका दोषी बताया। इससे पूर्व नीमा गीत ष्क्वचिद अर्थ, क्वचिद मैत्री, क्वचिद धर्म, क्वचिद यशष् द्वारा कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत हुई। तत्पश्चात नीमा सदस्यों द्वारा सभी वक्ताओं को पुष्प गुच्छ देकर स्वागत किया। सभागार में उपस्थित चिकित्सको को संबोधित करते हुए अध्यक्ष डॉ. डी.डी. सिंह ने कोरोना काल में आयुर्वेद की बढ़ती हुई लोकप्रियता की सराहना किया तथा लोगों से इसे अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी दवाओं के दुष्प्रभाव इतने खतरनाक हैं कि आदमी उसे लेने से डरता है। इसके विपरीत आयुर्वेद की दवाएं स्वास्थ्य को लाभ करती हैं और उनका दुष्प्रभाव भी नहीं के बराबर होता है।

कार्यक्रम के अंत में नीमा आज़मगढ़ द्वारा सभी वक्ताओं को अंग वस्त्रम देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्र गान के साथ हुआ। संगोष्ठी की अध्यक्षता पूर्व अध्यक्ष डॉ.वी.एस. सिंह ने और संचालन अकादमिक सचिव डॉ. विनोद कश्यप ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन नीमा के अध्यक्ष डॉ. डी.डी. सिंह ने किया। इस अवसर पर डॉ वी के सिंह, डॉ पी एन मिश्रा, डॉ ए के बरनवाल, डॉ दीपिका बरनवाल, डॉ कैलाश त्रिपाठी, डॉ के एन झा, डॉ उमेश पांडेय, डॉ अबुल बशर, डॉ उपेंद्र दूबे, डॉ नोमान अहमद, डॉ वेद प्रकाश सिंह, डॉ इमरान अहमद, डॉ अज़ीम अहमद, डॉ डी पी सिंह, डॉ जगदीश यादव, डॉ अबु शहमा खान, डॉ संध्या सिंह, डॉ मनीषा मिश्रा, डॉ श्रेष्ठा अग्रवाल, डॉ आरती सिंह, डॉ अजय कुमार सिंह, डॉ संतोष कुमार सिंह, डॉ एस सी राय, डॉ डी के राय, डॉ मो ताहिर, डॉ राजेश कुमार सिंह, डॉ नईम अहमद, डॉ साकिब जमाल, डॉ मनोज गोंड, डॉ विक्रम सिंह बागरी, डॉ विवेक सिंह पटेल, डॉ प्रभात गुप्ता, डॉ प्रदीप सरोज, डॉ सौरभ यादव, डॉ सुजय विश्वास, डॉ श्वेता विश्वास, डॉ सौरभ सिंह, डॉ विनोद कश्यप, डॉ वी एस सिंह, डॉ डी डी सिंह आदि सहित नीमा के पदाधिकारीगण और जिले के कोने कोने से आए चिकित्सकगण उपस्थित रहे।

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