वाराणसी। संवत् 2078 में भारत में दृश्य दो चंद्रग्रहणों में से आखिरी कार्तिक पूर्णिमा पर 19 नवंबर को लग रहा है जो खंडग्रास होगा. यह भारत के पूर्वाेत्तर भाग में अल्प समय के लिए दृष्टव्य होगा. यह चंद्रोदय के समय अरूणाचल प्रदेश व आसाम के कुछ स्थानों पर मोक्ष के समय दिखेगा. इसे पश्चिमी यूरोप, पश्चिमी अफ्रीका, उत्तर व दक्षिणी अमेरिका, एशिया, अंटार्कटिक महासागर, आस्ट्रेलिया व प्रशांत महासागर में दिखाई देगा. भारतीय मानक समयानुसार ग्रहण आरंभ दोपहर में 12.48 बजे, मध्य दिन में 2.33 बजे और मोक्ष दिन में 4.17 बजे होगा. ग्रहण का मोक्ष चंद्रोदय के समय आस्ट्रेलिया, थाईलैंड, इंडोनेशिया, भारत के पूर्वाेत्तर भारत, चीन, रूस में दिखाई देगा. इसकी अवधि लगभग 3.29 मिनट होगी.
ग्रहण कई शतकों बाद सबसे लंबा खंडग्रास चंद्रग्रहण होगा। ग्रहण कृतिका नक्षत्र, मेष राशि पर होगा. शास्त्रानुसार ग्रहण जहां दिखता है, वहीं धार्मिक मान्यता होती है लेकिन ग्रहण एक खगोलीय घटना है. इसका धरती पर कुछ न कुछ अशुभ प्रभाव देखने को मिलता है. इस साल 2021 में दो चंद्र ग्रहण का योग बना था. पहला चंद्र ग्रहण 26 मे 2021 में लगा था और 19 नवंबर को साल का दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण लग रहा है. इसके बाद 16 मई 2022 को अगला चंद्र ग्रहण लगेगा.
चंद्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण को धर्म और विज्ञान दोनों ही विशिष्ट घटना मानते हैं. दोनों ही क्षेत्र के विशेषज्ञों में ग्रहण को लेकर कौतूहल की स्थिति रहती है. इन खगोलीय घटनाओं का मानव जीवन पर भी व्यापक प्रभाव पड़ता है. वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ग्रहण एक खगोलीय घटना है, वहीं धार्मिक दृष्टिकोण में भी इसके अपने प्रभाव हैं. धार्मिक रूप से देखा जाए तो ग्रहण को ज्यादातर अशुभ फल देने वाला माना जाता है और इसी कारणवश ग्रहण के दौरान और सूतक काल लगने पर कई कार्यों को करने की मनाही होती है. चंद्र ग्रहण को आंशिक ग्रहण माना जा रहा है, इसलिए के दौरान सूतक नियमों का पालन नहीं किया जाएगा. सूतक काल पूर्ण ग्रहण की स्थिति में ही प्रभावी माना जाता है.

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