बलिया। निजी वीडियो वायरल होने के मामले में प्राथमिकी दर्ज कराने वाली भाजपा महिला कार्यकर्ता ने अब पार्टी के जिलाध्यक्ष संजय मिश्र पर गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला ने एक अक्तूबर को सीजीएम कोर्ट में शपथपत्र देकर जिलाध्यक्ष पर लगातार दुष्कर्म करने और नामजद आरोपियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया है। उसने विवेचना में जिलाध्यक्ष का नाम शामिल करने, चिकित्सीय परीक्षण कराने और न्यायालय के समक्ष बयान दर्ज कराने की मांग की है। महिला के मुताबिक उसने बांसडीह कोतवाली में जिला मंत्री आलोक सिंह, अजीत, गणेश और जिलाध्यक्ष संजय मिश्र के खिलाफ अश्लील वीडियो वायरल करने और दुष्कर्म की तहरीर दी थी। उसका आरोप है कि पुलिस पर दबाव डालकर जिलाध्यक्ष का नाम प्राथमिकी से हटवा दिया गया। महिला ने यह भी कहा कि अब तक विवेचक ने उसका बयान दर्ज नहीं किया है।
अदालत ने एक अक्तूबर को विवेचक को मामले की निष्पक्ष जांच करने का निर्देश दिया है। पुलिस पहले से निजी वीडियो के प्रसारण और उससे जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। कोतवाल बांसडीह राकेश कुमार सिंह ने कहा कि पूर्व में दर्ज प्राथमिकी की जांच चल रही है और उन्हें अदालत के आदेश की प्रति अभी प्राप्त नहीं हुई है।
जिलाध्यक्ष ने आरोपों को बताया साजिश
भाजपा जिलाध्यक्ष संजय मिश्र ने महिला के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। उनका कहना है कि आरोप निराधार हैं और उन्हें बदनाम करने के लिए साजिश के तहत लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की सच्चाई जांच में सामने आएगी और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रकरण को लेकर भाजपा के भीतर भी खेमेबाजी की चर्चाएं तेज हैं। सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों से जुड़े समर्थकों की ओर से आरोप-प्रत्यारोप किए जा रहे हैं, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पार्टी के वरिष्ठ नेता फिलहाल सार्वजनिक टिप्पणी से बच रहे हैं और मामले को पुलिस व न्यायिक प्रक्रिया के जरिए सुलझाने पर जोर दे रहे हैं।
फिलहाल मामला एक ओर महिला के गंभीर आरोप और अदालत में चल रही प्रक्रिया तथा दूसरी ओर जिलाध्यक्ष के स्पष्ट खंडन के बीच है। आरोपों की वास्तविक स्थिति पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

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