राज्य सूचना आयोग ने लगाया अर्थदंड, संशोधित सूचना उपलब्ध कराने के साथ अगली सुनवाई में स्वयं उपस्थित होने का निर्देश!
आजमगढ़। सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई सूचना उपलब्ध न कराने और आयोग के पूर्व आदेशों का अनुपालन नहीं करने पर उत्तर प्रदेश सूचना आयोग ने जिला पंचायत राज अधिकारी, आजमगढ़ के जनसूचना अधिकारी पर 25 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। राज्य सूचना आयुक्त राजेंद्र सिंह ने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित अधिकारी को लिखित स्पष्टीकरण के साथ आयोग के समक्ष स्वयं उपस्थित होने का निर्देश दिया है।
मामला अपील संख्या एस-002/1068/ए/2024 से संबंधित है। अपीलार्थी ने 12 दिसंबर 2023 को आरटीआई अधिनियम की धारा 6(1) के तहत जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय में आवेदन देकर 21 मार्च 2017 के शासनादेश के अनुपालन में कथित धांधली और स्वेच्छाचारिता से संबंधित जांच कार्रवाई की सूचना मांगी थी। सूचना नहीं मिलने पर 20 मार्च 2024 को प्रथम अपील और इसके बाद आयोग में द्वितीय अपील दाखिल की गई।
आयोग के आदेश के अनुसार, पूर्व में उपलब्ध कराई गई सूचना अपूर्ण थी। अपीलार्थी ने 23 जून 2025 को आपत्ति दाखिल की, लेकिन उसका निस्तारण नहीं किया गया। आयोग ने कई अवसर देते हुए संशोधित सूचना उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, लेकिन संबंधित जनसूचना अधिकारी की ओर से न तो पूर्ण सूचना उपलब्ध कराई गई और न ही आयोग के पूर्व आदेशों का अनुपालन किया गया।
आयोग ने इसे जानबूझकर सूचना उपलब्ध न कराने और आदेशों की अवहेलना मानते हुए आरटीआई अधिनियम की धारा 20(1) के तहत 250 रुपये प्रतिदिन की दर से अधिकतम 25 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया।
साथ ही मुख्य विकास अधिकारी कार्यालय, आजमगढ़ को भी मामले में पक्षकार बनाते हुए अपीलार्थी की आपत्ति के संबंध में संशोधित सूचना 15 दिन के भीतर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। सूचना उपलब्ध कराने के प्रमाण के साथ अगली सुनवाई में उपस्थित होने को कहा गया है। अनुपालन न होने पर संबंधित अधिकारी के विरुद्ध भी अर्थदंड की कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
आयोग ने जिलाधिकारी आजमगढ़ को आदेश की प्रति भेजते हुए संबंधित जनसूचना अधिकारियों को आयोग के समक्ष प्रभावी पैरवी सुनिश्चित कराने के निर्देश देने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर 2026 को होगी।

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