अखिलेश-संजय मुलाकात से कांग्रेस असहज...यूपी में नए विपक्षी समीकरणों की आहट!

सपा ने न सीट मांगी, न देने की बात कही; फिर भी 2027 से पहले बढ़ी राजनीतिक बेचैनी



‎लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह की मुलाकात ने विपक्षी राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। 23 अगस्त को लखनऊ में हुई इस मुलाकात के बाद सपा और आप के बीच संभावित राजनीतिक तालमेल की अटकलें तेज हुईं, हालांकि दोनों दलों की ओर से अब तक किसी गठबंधन या सीट बंटवारे की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
‎दिलचस्प यह है कि मुलाकात के बाद संजय सिंह ने संविधान, आरक्षण, सामाजिक न्याय और 69 हजार शिक्षक भर्ती जैसे मुद्दों पर चर्चा की बात कही। वहीं अखिलेश यादव की ओर से भी फिलहाल इसे चुनावी गठबंधन के रूप में पेश नहीं किया गया है। सपा की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि न तो आप ने सीट मांगी है और न ही सपा ने सीट देने की बात कही है। ऐसे में मुलाकात का राजनीतिक संदेश उसके घोषित एजेंडे से कहीं बड़ा माना जा रहा है।
कांग्रेस की नजर में मुलाकात का संदेश
‎यही मुलाकात कांग्रेस के लिए असहजता का कारण बन रही है। एक ताजा राजनीतिक रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस के भीतर यह संदेश गया है कि उत्तर प्रदेश में वह आप के साथ प्रत्यक्ष या परोक्ष चुनावी तालमेल से दूरी बनाए रखना चाहती है। हालांकि इसे अभी कांग्रेस का औपचारिक घोषित फैसला नहीं कहा जा सकता।
‎कांग्रेस की चिंता केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है। पंजाब में आप सत्ता में है और कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल की भूमिका में है। ऐसे में 2027 में पंजाब और उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति एक साथ गर्म होने के बीच कांग्रेस आप के साथ किसी साझा राजनीतिक मंच से बचना चाहती है। दिल्ली में दोनों दलों के बीच खुला चुनावी संघर्ष इस दूरी को और गहरा कर चुका है। 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 70 में 47 सीटें जीतीं, जबकि आप 22 सीटों पर सिमट गई और कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत सकी।
इंडिया ब्लॉक की पुरानी कहानी भी सामने
‎आप और कांग्रेस के रिश्तों में दरार नई नहीं है। आप ने 2025 में स्पष्ट किया था कि वह अब इंडिया गठबंधन का हिस्सा नहीं है और यह गठबंधन मूल रूप से 2024 लोकसभा चुनाव के लिए बना था।
‎ऐसे में अखिलेश और संजय सिंह की मुलाकात को कांग्रेस केवल उत्तर प्रदेश के नजरिये से नहीं देख रही। उसे आशंका है कि यदि सपा और आप के बीच किसी स्तर पर समझ बनती है तो इसका असर विपक्षी वोटों के व्यापक समीकरण पर पड़ सकता है।
यूपी में आप की ताकत कितनी?
‎उत्तर प्रदेश में फिलहाल आप की चुनावी जमीन सीमित है। 2022 विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 349 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन एक भी सीट नहीं जीत सकी और उसका वोट शेयर करीब 0.38 प्रतिशत रहा।
‎यही कारण है कि सपा के लिए आप के साथ किसी संभावित तालमेल का सवाल सीटों से ज्यादा राजनीतिक संदेश और वोट प्रबंधन से जुड़ा दिखाई देता है। आप के पास उत्तर प्रदेश में विधानसभा स्तर पर मजबूत संगठनात्मक आधार नहीं है, लेकिन संजय सिंह की सक्रियता उसे विपक्षी विमर्श में मौजूद रखती है।
अखिलेश के सामने दोहरी चुनौती
‎अखिलेश यादव के सामने 2027 में सबसे बड़ी चुनौती भाजपा के खिलाफ विपक्षी मतों को अधिकतम एकजुट रखना है। कांग्रेस के साथ संबंधों को लेकर पहले से ही बातचीत और मतभेद की खबरें आती रही हैं। इसी बीच आप से संपर्क की तस्वीर सामने आने से कांग्रेस के लिए अपने भविष्य के समीकरण को लेकर अतिरिक्त सावधानी स्वाभाविक है।
‎भाजपा ने भी इस मुलाकात को लेकर अखिलेश पर निशाना साधना शुरू कर दिया है और इसे उनके राजनीतिक विकल्पों की तलाश से जोड़कर देखा जा रहा है।
‎फिलहाल न सपा ने आप को गठबंधन में शामिल किया है, न आप ने सीटों की मांग सार्वजनिक की है और न कांग्रेस ने कोई औपचारिक निर्णय घोषित किया है। लेकिन राजनीति में कई बार औपचारिक घोषणा से पहले तस्वीरें और मुलाकातें ही संकेत दे देती हैं। अखिलेश-संजय की मुलाकात ने कम से कम इतना जरूर साफ कर दिया है कि 2027 की लड़ाई में विपक्षी खेमे के भीतर सीटों से पहले सियासी भरोसे और साझेदारों की सीमा तय करने की कवायद शुरू हो चुकी है।

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