गोपनीय डायरी में चढ़ावा गणना कक्ष से रकम बरामदगी, संदिग्धों से पूछताछ और बाद में एसआईटी जांच तक का घटनाक्रम दर्ज होने का दावा
अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावे की रकम से जुड़े कथित चोरी प्रकरण में मंदिर परिसर के भीतर की जानकारी समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव तक पहुंचने को लेकर तत्कालीन श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय की कथित गोपनीय डायरी में गंभीर सवाल दर्ज होने की बात सामने आई है। डायरी में दर्ज विवरण के मुताबिक, अखिलेश यादव के बयान के बाद चंपत राय के सामने यह सवाल उठा था कि “हमारे बीच में छिद्र कहां है, कौन भेदिया है?”
डायरी में दर्ज घटनाक्रम के अनुसार, चंपत राय चार जून को ट्रेन संख्या 14206 से दिल्ली से अयोध्या के लिए रवाना हुए थे। उसी रात करीब 9:30 बजे कार्यकर्ता आनंद चौधरी के वाट्सएप संदेश से उन्हें हुंडी गणना कक्ष के शौचालय में नोटों की गड्डी मिलने की जानकारी मिली। करीब 2.25 लाख रुपये की रकम मिलने के बाद मंदिर परिसर में मामले की पड़ताल शुरू हुई।
अगले दिन सीसीटीवी फुटेज खंगाली गई। कथित तौर पर शाम की दूसरी शिफ्ट में काम करने वाले तीन गणना कर्मियों पर संदेह गया। पांच जून की रात उन्हें घर जाते समय रोककर पूछताछ की गई। इसके बाद उनके घरों से अलग-अलग रकम मंगाकर बरामद किए जाने का विवरण डायरी में दर्ज होने का दावा किया गया है।
एफआईआर के बजाय परिसर में पूछताछ का दौर
डायरी के मुताबिक, गोपाल राव ने चंपत राय को संदिग्धों के पकड़े जाने और एफआईआर दर्ज कराने की जानकारी दी। हालांकि, चंपत राय ने तत्काल एफआईआर कराने से इनकार करते हुए परिसर में मौजूद पुलिस को मामले की जानकारी देने की बात कही।
इसके बाद रातभर पूछताछ का सिलसिला चला। संदिग्धों से उनके घरों से रकम मंगाई गई। पूछताछ में जिन लोगों के खिलाफ मामला स्पष्ट नहीं हुआ, उन्हें उनके परिजनों को बुलाकर सौंपने की बात भी डायरी में दर्ज होने का दावा है।
बरामद रकम को अलग-अलग झोलों में रखा गया और प्रत्येक झोले पर संबंधित व्यक्ति का नाम, रकम लाने वाले का नाम, तारीख और धनराशि लिखी गई। बाद की पूछताछ में सीसीटीवी फुटेज के आधार पर कुछ अन्य लोगों को भी बुलाए जाने और उनसे रकम बरामद किए जाने का विवरण सामने आता है।
एक संदिग्ध की तलाश मोबाइल लोकेशन के आधार पर किए जाने तथा उसके बहराइच जिले में नेपाल सीमा के करीब मिलने का भी डायरी में उल्लेख होने की बात कही गई है।
अखिलेश के बयान के बाद उठा ‘भेदिया’ का सवाल
मामले में सबसे महत्वपूर्ण मोड़ तब आया, जब लखनऊ में अखिलेश यादव ने घटना को लेकर बयान दिया। डायरी के अनुसार, इसके बाद चंपत राय ने यह जानने की कोशिश की कि मंदिर परिसर की अंदरूनी घटना की जानकारी अखिलेश यादव तक किस माध्यम से पहुंची।
यहीं डायरी में कथित तौर पर यह सवाल दर्ज है—“हमारे बीच में छिद्र कहां है, कौन भेदिया है?”
हालांकि, इस सवाल का अर्थ यह नहीं निकाला जा सकता कि डायरी में किसी व्यक्ति को निश्चित रूप से ‘भेदिया’ घोषित किया गया था। यह उस समय सूचना के बाहर पहुंचने को लेकर उठाया गया सवाल था।
एसएसपी आवास पर बैठक, फिर जांच का फैसला
डायरी के अनुसार, उसी शाम डॉ. अनिल मिश्र, एसपी सुरक्षा और चंपत राय तत्कालीन एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर के आवास पहुंचे। वहां चर्चा के बाद चंपत राय ने चार-पांच पंक्तियों का बयान तैयार कर मीडिया को दिया।
इसके बाद 11 जून को लखनऊ में महत्वपूर्ण बैठक हुई। इसमें चंपत राय, गोपाल राव, डॉ. अनिल मिश्र, स्वामी गोविंद देव गिरी, नृपेंद्र मिश्र, कृष्ण मोहन और क्षेत्र प्रचारक अनिल कुमार सिंह के शामिल होने का उल्लेख है।
बैठक में पूरे घटनाक्रम पर चर्चा हुई। प्रारंभिक तौर पर उच्च न्यायालय के तीन सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की समिति से जांच कराने का विचार सामने आया, लेकिन बाद में यह प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ा। इसके स्थान पर मामले की जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) से कराने का निर्णय लिए जाने की बात डायरी में दर्ज होने का दावा है।

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