आजमगढ़। बेहतर भविष्य और रोजगार की तलाश में रूस गए जिले के दो युवकों की जिंदगी आखिरकार ताबूत में लौटकर घर पहुंची। कुक और सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी का सपना लेकर विदेश गए अजहरूद्दीन खान और रामचंद्र के कंकाल बृहस्पतिवार को उनके घर पहुंचे तो परिजनों की चीख-पुकार से पूरा इलाका गमगीन हो गया।
परिवार वालों के मुताबिक दोनों युवकों को नौकरी का झांसा देकर रूस भेजा गया था, लेकिन बाद में उन्हें रूस-यूक्रेन युद्ध क्षेत्र में भेज दिया गया। करीब तीन वर्षों से जारी इस युद्ध में आजमगढ़ और आसपास के कई युवकों के फंसने की खबरें सामने आती रही हैं।
जनवरी 2024 में आजमगढ़ और मऊ जिले के कई युवक एजेंटों के माध्यम से रोजगार के लिए रूस गए थे। इनमें से आजमगढ़ के कन्हैया यादव तथा मऊ के श्यामसुंदर और सुनील यादव की पहले ही मौत हो चुकी है। वहीं राकेश यादव और बृजेश यादव घायल अवस्था में स्वदेश लौट आए थे। इसके अलावा कई युवक लंबे समय तक लापता बताए जा रहे थे।
कंधरापुर थाना क्षेत्र के खोजापुर माधवपट्टी निवासी योगेंद्र यादव भी इसी समूह में शामिल थे। परिजनों का आरोप है कि मऊ के एक एजेंट ने सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी का झांसा देकर युवकों को रूस भेजा और बाद में उन्हें युद्ध क्षेत्र में पहुंचा दिया। 15 जनवरी 2024 को कई युवक एजेंटों के साथ रूस गए थे।
अजहरूद्दीन के भाई अजीमुद्दीन ने बताया कि भाई की तलाश में उन्होंने अपनी सऊदी अरब की नौकरी तक छोड़ दी। पिछले दो वर्षों से वह एंबेसी से लेकर रूस तक लगातार प्रयास करते रहे। उन्होंने कहा कि सरकार की मदद और लंबी मशक्कत के बाद भाई का शव मिल सका है।
अजीमुद्दीन ने पूरे मामले को बड़ा स्कैम बताते हुए दोषी एजेंटों और एजेंसी संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि रोजगार का सपना दिखाकर युवकों को युद्ध की आग में झोंक दिया गया, जिसके कारण कई परिवार तबाह हो गए।

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