आजमगढ़ : शहीदों के परिवार का सहारा बना लाइफ लाइन हॉस्पिटल: सेवा, समर्पण और संवेदना की जीवंत मिसाल!



आजमगढ़।जब देश की सीमाओं पर हमारे वीर सैनिक अपने प्राणों की आहुति देकर राष्ट्र की रक्षा करते हैं, तब उनके परिवारों की जिम्मेदारी केवल सरकार तक सीमित नहीं रह जाती, बल्कि पूरे समाज का कर्तव्य बन जाती है। इसी भावना को आत्मसात करते हुए लाइफ लाइन हॉस्पिटल वर्षों से शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों के लिए निःस्वार्थ सेवा का उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है।
अस्पताल स्थापना दिवस से ही इन परिवारों को निःशुल्क एवं समर्पित स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करता आ रहा है। अस्पताल प्रबंधन का मानना है कि देश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर करने वाले सैनिक पहले ही राष्ट्र को सबसे बड़ी “फीस” अदा कर चुके हैं—ऐसे में उनके परिवारों की सेवा करना समाज का कर्तव्य है।
सेवा से बना भावनात्मक रिश्ता
स्वतंत्रता सेनानी और शहीद परिवारों—जैसे लालचंद जी, कर्नल निजामुद्दीन जी, शकुंतला जी और शहीद सैनिक रामसमुझ, रमेश यादव व सुनोद जी के परिजनों—के साथ अस्पताल का रिश्ता केवल इलाज तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समय के साथ यह एक गहरा भावनात्मक जुड़ाव बन गया है। आज ये सभी परिवार “लाइफ लाइन परिवार” का हिस्सा बन चुके हैं।
मानवता का जिंदा उदाहरण: जटिल ऑपरेशन सफल
हाल ही में इस सेवा भाव की एक मिसाल तब सामने आई, जब एक शहीद सैनिक की माता जी गंभीर दुर्घटना का शिकार हो गईं। उनकी स्थिति अत्यंत नाजुक थी और तत्काल ब्रेन सर्जरी की आवश्यकता थी। इस चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में प्रोफेसर डॉ. अनूप कुमार सिंह (हेड, न्यूरोसर्जरी), डॉ. आकाश, डॉ. नीरज सिंह, डॉ. गायत्री कुमारी (हेड, एनेस्थीसिया) और डॉ. ज्योति सिंह की टीम ने पूरी रात अथक परिश्रम कर जटिल ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। यह सर्जरी अत्यंत जोखिम भरी थी, जिसमें मरीज के मस्तिष्क के दोनों हिस्सों पर ऑपरेशन करना पड़ा। डॉक्टरों की कुशलता, समर्पण और निरंतर प्रयासों से ऑपरेशन सफल रहा और अब मरीज स्वस्थ होकर नई जिंदगी की ओर लौट रही हैं।
सिर्फ इलाज नहीं, सच्ची श्रद्धांजलि
यह घटना केवल एक सफल ऑपरेशन नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना, कर्तव्यनिष्ठा और देशभक्ति का सजीव उदाहरण है। अस्पताल प्रबंधन ने पुनः संकल्प लिया है कि वह भविष्य में भी इसी सेवा भाव के साथ शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों की देखभाल करता रहेगा। यह पहल केवल चिकित्सा सेवा नहीं, बल्कि उन बलिदानों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है, जिन्होंने राष्ट्र के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। जब तक लाइफ लाइन हॉस्पिटल की दीवारें खड़ी हैं, तब तक यह सेवा और समर्पण का यह सिलसिला यूं ही चलता रहेगा…

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