आजमगढ़। कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता मोहन प्रकाश ने कहा कि स्वर्गीय शरद यादव उन विरले नेताओं में से थे, जिन्होंने देश के स्वतंत्रता आंदोलन के मूल्यों को अपने राजनीतिक जीवन में आत्मसात किया और दलितों, पिछड़ों, गरीबों, किसानों व बेरोजगारों की लड़ाई संसद से लेकर सड़क तक मजबूती से लड़ी। मोहन प्रकाश सोमवार को आजमगढ़ के नेहरू हाल में आयोजित शरद यादव की तीसरी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि शरद यादव ने अपने जीवन में जिन छात्र संघों की स्थापना की थी, आज शिक्षा के बढ़ते बाजारीकरण को रोकने के लिए उन्हें दोबारा बहाल करना समय की आवश्यकता है। यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
“लोकतंत्र की सीढ़ी को ही काटा जा रहा”
मोहन प्रकाश ने वर्तमान राजनीतिक हालात पर चिंता जताते हुए कहा कि—“आजादी के बाद देश को स्वतंत्रता आंदोलन के मूल्यों से चलाने की कोशिश की गई। पार्टियां अलग थीं, लेकिन विचारधारा एक थी। आज इसके विपरीत देश को चलाया जा रहा है और यह सब निर्लज्जता के साथ हो रहा है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतंत्र के रास्ते से सत्ता में आने वाले लोग ही आज उसी लोकतंत्र की नींव को कमजोर कर रहे हैं।
उन्होंने छात्र राजनीति के कमजोर होने पर सवाल उठाते हुए कहा कि आज छात्र संघ इसलिए नहीं बन रहे, क्योंकि शिक्षा व्यवस्था को जानबूझकर कमजोर किया जा रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ी सिर्फ “विश्व गुरु” के नारों में उलझी रहे।
विचारधारा की लड़ाई की जरूरत
मोहन प्रकाश ने कहा कि देश में सत्ता और जनता आमने-सामने खड़ी है और जनता को अपनी आवाज उठाने का अधिकार तक नहीं मिल पा रहा। उन्होंने कहा कि यदि सत्ता पक्ष में साहस है तो सरकार छोड़कर देश में विचारधारा की खुली लड़ाई होनी चाहिए, तब पता चलेगा कि जनता किसके साथ है।
सर्वदलीय उपस्थिति, हाल रहा खचाखच भरा
कार्यक्रम की अध्यक्षता बशीउद्दीन अहमद एडवोकेट ने की। कार्यक्रम संयोजक रामचंदर यादव, ज्ञान प्रकाश दुबे एवं संचालक राणा प्रताप यादव ने मोहन प्रकाश सहित समाजवादी नेता विजय नारायण, गोविंद यादव, पूर्व मंत्री चंद्रदेव यादव और भाजपा नेता रामाधीन सिंह का माल्यार्पण कर स्वागत किया। सभा में सपा, भाजपा, कांग्रेस सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के पदाधिकारी, समाजसेवी एवं बड़ी संख्या में आम नागरिक मौजूद रहे। नेहरू हाल पूरी तरह खचाखच भरा रहा।
वक्ताओं ने बताया सामाजिक न्याय का प्रहरी
सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि शरद यादव संसद में दलितों, पीड़ितों, शोषितों और किसानों की सशक्त आवाज थे। उन्होंने कभी दबाव की राजनीति नहीं की और भटकते राजनेताओं को सही दिशा दिखाने का कार्य किया। कई वक्ताओं ने समाजवादी राजनीति में बढ़ते परिवारवाद की आलोचना करते हुए कहा कि शरद यादव इसके कट्टर विरोधी थे।
प्रमुख वक्ताओं में शामिल रहे
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से— गोविंद यादव (जबलपुर), समाजवादी नेता व विचारक विजय नारायण, पूर्व मंत्री चंद्रदेव यादव, करेली विधायक अखिलेश यादव, भाजपा नेता रामाधीन सिंह, जिलाध्यक्ष हवलदार यादव, कांग्रेस जिलाध्यक्ष कौशल कुमार सिंह, कामरेड जयप्रकाश राय, जुल्फिकार बेग, पूर्व जिला पंचायत सदस्य चंद्रशेखर यादव सहित अनेक नेताओं और समाजसेवियों ने अपने विचार रखे।
“समाजवाद के अग्रदूत थे शरद यादव”
सभा के अंत में कार्यक्रम संयोजक रामचंदर यादव ने शरद यादव को समाजवाद का अग्रदूत बताते हुए कहा कि— “इस श्रद्धांजलि सभा का उद्देश्य शरद यादव के सामाजिक न्याय के संघर्ष और उनके राजनीतिक योगदान को याद करना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।” उन्होंने सभी आगंतुकों और वक्ताओं के प्रति आभार प्रकट किया।


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