बलिया। जिले में एक रहस्यमयी मठ है, जिसकी मान्यता काफी अजीबो-गरीब है। यहां आज दिन तक कोई ऐसा मठाधीश नहीं रहा, जो जीते जी मठ से कभी बाहर निकला हो। कहावत है कि इस मठ में खुद कपिलमुनि पांडेय ने तपस्या करते हुए एक लक्ष्मण रेखा खींच दी थी। साथ ही आदेश दिया था कि कोई भी मठाधीश इस सीमा को पार न करे। तब से लेकर आज तक इस मठ की परंपरा और डर, दोनों बरकरार हैं। यहां के मठाधीश बाहर की दुनिया नहीं देख सकते हैं।
यह रहस्यमयी मठ बैरिया थाना क्षेत्र अंतर्गत रकबा टोला गांव में है। इस मठ का नाम मुन जी बाबा की मठिया है। वर्तमान मठाधीश जयनारायण पांडेय के अनुसार- वो इस परंपरा की आठवीं पीढ़ी में महंथ हैं। यह मठ कपिलमुनि पांडेय उर्फ मुन जी बाबा की तपस्थली है। बाबा भक्ति में इतने लीन हो गए थे कि उन्होंने एक लक्ष्मण रेखा खींच दी और वहीं बैठकर तपस्या करने लगे। वे चाहते थे कि अगर भक्ति में शक्ति है तो भगवान स्वयं दर्शन देंगे। तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान ने दर्शन दिया, लेकिन बाबा ने वरदान लेने से मना कर दिया और उसी रेखा के भीतर प्राण त्याग दिए। तभी से यह नियम बन गया कि मठ का मठाधीश इस लक्ष्मण रेखा को कभी पार नहीं करेगा। मौत के बाद भी उन्हें मठ के दायरे में ही दफन कर दिया जाता है।
मठ से जुड़ी दो घटनाएं इस मान्यता को और भी गहरा बना देती हैं। पहली घटना के अनुसार, पूर्व मठाधीश घरभरन बाबा ने एक बेटी का कन्यादान करने के लिए लोगों के जिद्द करने पर पालकी से मठ की सीमा पार की थी। मगर लौटते समय उन्हें एक काले नाग ने डंस लिया और उनकी मौत हो गई। साथ ही वो बेटी भी उसी दिन विधवा हो गई। दूसरी घटना में एक मठाधीश आम तोड़ने गए, पेड़ सीमा के अंदर था। लेकिन उनका एक पैर गलती से बाहर चला गया। कुछ ही दिनों में उनका वही पैर जल गया और महीनों बिस्तर पर रहना पड़ा।
बाबा ने कहा कि वो यहां 16 साल से पुजारी हैं। लेकिन आज तक हिम्मत नहीं हुई कि मंदिर से बाहर जा सकें। इस अद्भुत मठ पर आज भी पूर्व मठाधीशों की खड़ाऊं की पूजा होती है। कहा जाता है कि मठ में सच्चे मन से की गई प्रार्थना जरूर पूरी होती है। केवल मठाधीश को मठ की सीमा पार नहीं करनी है, वरना अनहोनी निश्चित है। यही वजह है कि इस मठ के मठाधीश आज भी बाहरी दुनिया से वंचित हैं।

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