आजमगढ़। हरबंशपुर स्थित सर्वाेदय पब्लिक स्कूल के प्रांगण संचेतना वार्षिकोत्सव के अंतर्गत वार्षिक कार्यक्रम तथा फन एण्ड ऐनुवल फिस्टा कम फेटे का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राहुल विश्वकर्मा, विशिष्ट अतिथि रोहित कुमार यादव व पूर्व मंत्री डॉ कृष्ण मुरारी विश्वकर्मा की उपस्थित ने चार चाँद लगा दिया। कार्यक्रम की शुरूआत सर्वप्रथम मुख्य अतिथि के द्वारा माँ सरस्वती प्रतिमा पर माल्यार्पण अर्पित व दीप प्रज्जवलित कर के किया गया। संस्थापक प्रबन्धक राजेन्द्र प्रसाद यादव, निदेशिका कंचन यादव, प्रधानाचार्य विधान तिवारी ने भी माँ सरस्वती जी की प्रतिमा पर श्रद्धा सुमन समर्पित कर वन्दन किया। तत्पश्चात कार्यक्रम की शुरूआत गणेश वन्दना के साथ की गई। इसी क्रम में छोटे-छोटे बच्चों के द्वारा बूम-बूम डांस, अन्य के द्वारा हरियानवी डांस, राजस्थानी डांस, कठपुतली डांस, अनेकता में एकता को दर्शाते हुए डांस, रिश्तों की समृद्धि डोर को दर्शाता डांस, महिषासुर मर्दनी डांस की प्रस्तुति अत्यंत मोहक एवं जीवन्त सी प्रतीत हो रही थी। सर्वाेदय स्कूल के बच्चों के द्वारा देश के विभिन्न क्षेत्रों में होने वाले सांस्कृतिक नृत्य, लोक नृत्य आदि का मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किया। इन सबके माध्यम से एक भारत श्रेष्ठ भारत की स्थापना व अनेकता में एकता को पिरोकर, बच्चों को इस लायक बनाना कि भविष्य में ये इसके अनुकूल अपने आप को ढाल सकें। इस अवसर पर विद्यालय के रॉक-बैंड की तरफ से वाद्य यंत्रों के द्वारा शानदार प्रस्तुति की गई। कार्यक्रम के अन्त में लकी ड्रा के माध्यम से बच्चों को पुरस्कार भी वितरित किया गया। मुख्य अतिथियों ने बच्चों से अपने लक्ष्य के प्रति सजग रहने व उसको आत्मविश्वास के साथ पूर्ण करने का तरीका बताया तथा बच्चों के उज्जवल भविष्य की कामना की। विद्यालय के प्रबंधक राजेन्द्र प्रसाद यादव ने वार्षिक उत्सव पर बच्चों के आत्मविश्वास की सराहना की व कहा यह कार्यक्रम बच्चों के बिना अधूरा है। बच्चे ही देश के भविष्य है। विभिन्न कार्यक्रमों व नृत्यों से उनको कई सारी जानकारियाँ मिलती है व आत्मविश्वास की भी वृद्धि होती है। इस अवसर प्रवेश सिंह, प्रवक्ता, डॉ० राम बहादुर यादव, डॉ० डी०पी० मौर्या, प्रबन्धक रमाकान्त यादव, रमाकान्त वर्मा, अशोक श्रीवास्तव, विजय शंकर यादव पहलवान, प्रवीण सिंह, आद्या प्रसाद सिंह एडवोकेट, गोविंद सिंह समेत अध्यापक व कर्मचारी उपस्थित थे।

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