मनोज श्रीवास्तव/लखनऊ। इजरायल और हमास की जंग को लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जुबानी जंग बढ़ गया है। प्रशासन की जरा सी चूक बड़ी मुसीबत बन सकती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फरमान जारी कर रखा है कि इजरायल-फलस्तीन (फलस्तीन पोषित हमास) को लेकर सोशल मीडिया या सार्वजनिक स्थानों पर बहस करने से बचें। इसके विपरीत अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुछ छात्रों द्वारा, बरेलवी समुदाय के धर्मगुरु तौकीर रजा बरेलवी, बीते शुक्रवार को जुमे की नमाज पर आये नमाजियों से राज्य के कई मस्जिदों के मौलानाओं द्वारा तथा जमीयत उलेमा ए हिन्द द्वारा खुलेआम फलस्तीन को समर्थन दिया गया है। इसके जवाब में सहारनपुर-मेरठ के ठाकुर सम्मेलन में इजरायल को समर्थन का ऐलान किया गया। रविवार को मेरठ में जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वर्ल्ड मुस्लिम लीग के सदस्य मौलाना सैयद अरशद मदनी ने फलस्तीन पर लगातार हो रहे इस्राइली हमलों की कड़ी निंदा की है।उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संगठनों को इस्राइल के आक्रमण को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि उनका संगठन फलस्तीन और वहां की जनता के अधिकारों के लिए उनके साथ खड़ा है। रविवार को मौलाना सैयद अरशद मदनी ने बयान जारी कर कहा कि फलस्तीन की अवाम अपनी मातृभूमि की आजादी के लिए लड़ रही है और अपनी जानों की कुर्बानी दे रही है। जबकि इस्राइल लगातार वहां की जनता पर कहर बरपा रहा है।जिसकी जितनी निंदा की जाए कम है।मौलाना मदनी ने दुख का इजहार करते हुए कहा कि यह बेहद अफसोस की बात है कि दुनिया में मानवाधिकारों का ढिंढोरा पीटने व एकता और शांति की बात करने वाले तमाम संगठन आज फलस्तीन के मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं। मौलाना मदनी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, वर्ल्ड मुस्लिम लीग और अन्य संगठनों से आह्वान किया कि वह इसमें तत्काल प्रभाव से हस्तक्षेप कर वहां शांति स्थापना के लिए सकारात्मक कदम उठाएं। मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि हिंदुस्तान ने हमेशा शांति की स्थापना के लिए फलस्तीनी नागरिकों के अधिकारों की बात की है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, पंडित जवाहर लाल नेहरु, रफी अहमद किदवई, अटल बिहारी वाजपेयी और मौलाना अबुलकलाम आजाद ने हमेशा फलस्तीन और वहां के नागरिकों का समर्थन किया है।
दूसरी तरफ रविवार को ही सहारनपुर-मेरठ के ठाकुर सम्मेलन में भाजपा पूर्व विधायक व फायरब्रांड हिंदूवादी नेता संगीत सोम ने कहा कि पैंठ से पैसा लेकर हमास जैसा संगठन बनाने की साजिश चल रही है। देशभर में हर सप्ताह लगने वाली सप्ताहिक पैंठ में कुछ लोग पैसा इकट्ठा कर रहे हैं। इसकी जांच होनी चाहिए कि क्या इस पैसे से हमास जैसा संगठन तो नहीं तैयार किया जा रहा। अलीगढ़ से लेकर कश्मीर तक हमास के समर्थन में प्रदर्शन हो रहा है। समर्थन करने वाले भी आतंकवादी ही हैं। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय जैसे संस्था में ताले डाल देना चाहिए, जहां आतंकवाद पढ़ा जाता है।उन्होंने कहा कि हम इस्राइल के साथ हैं। इस्राइल के समर्थन का विरोध करने वाले मौलाना तौकीर रजा जैसे लोगों को जेल में डाल देना चाहिए।
सोम ने अपने समाज से एक समाज के लोगों द्वारा लगाई जा रेहड़ी, खोमचे वालों से सामान लेने का बहिष्कार करने का आह्वान किया। पश्चिम उत्तर प्रदेश के बंटवारे पर संगीत सोम ने कहा कि हम इसका विरोध करते हैं पश्चिम के जिलों को मिलाकर दिल्ली से जोड़ा जाए। बैठक में आए राजपूत समाज के लोगों से उन्होंने कहा कि हमें इस पर चिंतन करना होगा कि आज हम यहां क्यों इकट्ठे हुए हैं। इस चिंतन की जरूरत क्या क्यों पड़ी। हकीकत तो यह है कि आज पश्चिम में स्थिति खराब है। समाज को इस पर मंथन करना होगा। हमारी माता-बहनों ने अपनी आन के लिए जौहर दिया था। हमें आज भी देखना है कि जौहर क्यों होता था। हमारा इतिहास बलिदान से भरा है। हमें अपना इतिहास याद रखना होगा, हमें जो चाहिए वह संविधान के दायरे में रहकर लेना होगा।


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