Azamgarh:मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने को कर दिया कुर्बान: रामाधीन सिंह

जयंती पर याद किए गए महाराणा प्रताप


आजमगढ़।
महाराणा प्रताप सेना के सेना प्रमुख बिजेन्द्र सिंहके निर्देश पर मड़या स्थित गरूड़ होटल के सभागार में मंगलवार को महाराणा प्रताप की जयंती प्रभु नारायण पांडेय प्रेमी की अध्यक्षता में मनाई गई। मुख्य अतिथि हेमंत सिंह महाराष्ट्र प्रदेश प्रभारी ने महाराणा प्रजाप के चित्र पर पुष्प अर्पित कर दीप प्रज्जवलित किया गया।

महाराणा प्रताप के जीवनवृत्त पर प्रकाश डालते हुए बतौर मुख्य अतिथि हेमंत सिंह ने कहाकि आज के ही दिन इनका जन्म मेवाड़ के कुंभलगढ़ में सिसोदिया वंश में हुआ था। पिता का नाम उदय सिंह द्वितीय और माता का नाम महारानी जयवंता बाई था। महाराणा प्रताप अपने सभी भाई-बहनों में सबसे ज्यादा युद्ध में माहिर थे।

मुख्य वक्ता रामाधीन सिंह ने कहाकि उन्होंने अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए संघर्ष करके हुए अपने प्राण त्याग दिए थे। महाराणा प्रताप ने मुगल साम्राज्य के विस्तार वाद के खिलाफ सैन्य प्रतिरोध और हल्दीघाटी, देवर की लड़ाई काफी अहम मना जाती है। उन्हें अकबर की अवज्ञा और उनके वफादार घोड़े चेतक की बहादुरी के लिए याद किया जाता है। महाराणा ने उस समय मुगल साम्राज्य के खिलाफ बहादुरी से लड़ाई लड़ी जब दूसरों ने अकबर के वर्चस्व को स्वीकार कर लिया था।

वरिष्ठ अधिवक्ता शत्रुघ्न सिंह व भागवत तिवारी ने कहाकि महाराणा प्रताप ने स्वाभिमान के लिए घास की रोटी खाया किन्तु उन्होने स्वाभिमान से कोई समझौता नहीं किया। उनके जीवन से प्रेरणा लेकर उनको आत्मसात करने की जरूरत है। संचालन प्रदेश प्रभारी अनिल सिंह ने किया।

इस मौके पर प्रदेश संरक्षक हरिलाल यादव, आजमगढ़ जिलाध्यक्ष सूरेश सिंह, महासचिव सीबी सिंह, घंटी सिंह, वरूण सिंह, जय सिंह, सुरेश यादव, हरिवंश सिंह, पवन चौहान, अशोक यादव, जवाहर सिंह, अरूण सिंह, दीना सिंह, हरेन्द्र, राजेश, चंदन, लकी, अच्युतानंद त्रिपाठी, राघवेन्द्र, गौरव सिंह सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।

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