चंदा देकर टैक्स बचाने का खेलः 125 कार्यकर्ताओं पर लुटा दिए 11 करोड़..

जनराज्य पार्र्टी पर आयकर विभाग का छापा, चंदा बटोरने वाली पार्टी के खिलाफ चुनाव आयोग का अभियान


कानपुर। आयकर विभाग की टीम ने प्रदेश में कागजी पार्टी बना कर करोड़ों रूपए की हेराफेरी कर धन की उगाही करने का खुलासा किया है. कानपुर में जनराज्य पार्टी के तीनों परिसरों पर दूसरे दिन भी छापेमारी जारी रही. अब तक की छानबीन में कई बोगस दस्तावेज मिले हैं. इस पार्टी की राजनीतिक सक्रियता शून्य है मगर 125 कार्यकर्ताओं पर 11.5 करोड़ रुपये का खर्च दिखा गया है. दरअसल, राजनीतिक दलों को चंदा देने पर आयकर में छूट मिलता है. लोग पार्टियों या एनजीओ को चंदा देते हैं जिसका लाभ उन्हें आयकर में छूट के तौर पर मिलता है. वहीं आरोप लगते हैं कि कागजी पार्टियां या एनजीओ कमीशन काटकर दान या चंदे में मिला पैसा कैश में लौटा देते हैं.

गुरुवार को पार्टी के पूर्व मुख्य महासचिव ओमेन्द्र सिंह के बयान भी आयकर विभाग ने दर्ज किए. पार्टी एवं पार्टी के पदाधिकारियों के बैंक स्टेटमेंट लिए गए हैं. जिसमें जांच की जाएगी कि किन-किन लोगों ने पार्टी फंड में और पदाधिकारियों के खातों में रूपए भेजे है. यूपी की जनराज्य पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभिषेक कृष्णा और संस्थापक रविशंकर सिंह यादव के यहां काकादेव, किदवई नगर और केशवनगर में छापे के दौरान कई खुलासे हुए हैं। सूत्रों के मुताबिक पार्टी पूरी तरह कागजी है. कहीं राजनीतिक भागीदारी के कोई प्रमाणपत्र नहीं मिले. यहां तक की एक पोस्टर या पम्फलेट तक नहीं मिला है. पार्टी का जनाधार, सदस्य, पदाधिकारी और कितने राज्यों में सक्रियता में इसके कोई प्रमाण नहीं मिले.

साथ ही चुनाव में भी भागीदारी नहीं मिली है. अब तक 125 कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बारे में पता चला है. मालूम हो कि अपनी ऑडिट बैलेंस शीट में पार्टी ने 4 साल में मिले 11.5 करोड़ रुपये के बारे में कार्यकर्ताओं पर खर्च किया गया है. इस हिस्सा से एक कार्यकर्ता पर करीब 9 लाख रुपये खर्च किए गए. ये दावा आयकर विभाग के गले नहीं उतर रहा है. आयकर विभाग चंदे की आड़ में ब्लैक एंड व्हाइट के संकेतों को लेकर मामले की छानबीन कर रही है. वहीं बैलेंस शीट में भी न तो दानदाताओं का नाम है और न ही पता है. आधी अधूरी बैलेंस शीट पूरी तरह से सवालिया निशान लगा रहे है. पार्टी को कुछ दानदाताओें नेे दस-दस लाख का चंदा दिया है मगर आईटीआर में कमाई इतनी नहीं है कि उतना चंदा दे सके.

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