प्रदेश में एक सर्वेक्षण के आधार पर, परियोजना क्षेत्रों में औसतन 8.58 कुंतल प्रति हेक्टेयर उत्पादन में वृद्धि हुई है। इससे लगभग 48.53 प्रतिशत आय में वृद्धि भी देखी गई और भूगर्भ जल स्तर में 1.42 मीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सरकार जैविक क्लस्टर को बढ़ावा देने के लिए कुल 4784 क्लस्टर बनाए हैं। इसमें 95,680 हेक्टेयर भूमि पर जैविक खेती की जा रही है। इसमें 1.75 लाख किसानों को जोड़ा गया है। इस नीति में तीन-वर्षीय कार्यक्रम के अंतर्गत, एक क्लस्टर में लगभग 50 किसान जोड़े जाते हैं।
आगामी 100 दिनों की कार्ययोजना के तहत मिशन प्राकृतिक खेती के अंतर्गत भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति योजना को प्रदेश के 35 जिलों में लागू किया जाएगा। इसके लिए विकास खंड स्तर पर 500 से एक हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल के क्लस्टर का गठन होगा। यह योजना खरीफ 2022 से शुरू की जाएगी और इस पर 82.83 करोड़ खर्च किए जाएंगे। बुंदेलखंड के जिलों में गो आधारित प्राकृतिक खेती की जाएगी।
प्रदेश सरकार ने पराली प्रबंधन के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय काम किया है। किसानों को राहत देने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। प्रदेश में पराली को गोशालाओं में चारे के रूप में आपूर्ति किए जाने के लिए पराली दो-खाद लो अभियान का असर दिखने लगा है। यही वजह है कि पिछले पांच वर्षों में प्रति लाख हेक्टेयर धान के क्षेत्रफल में पराली जलाने की प्रदेश में औसत 71 घटनाएं सामने आईं हैं जबकि एनसीआर में 132 घटनाएं दर्ज हुईं हैं। वहीं, पंजाब में यह संख्या 2264 व हरियाणा में 452 दर्ज की गई हैं।

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