रामपुर। 18 वीं विधानसभा चुनाव में मुस्लिम मतों के बूते मजबूत विपक्ष के रूप में खड़ी हुई समाजवादी पार्टी के सामने पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक और मुस्लिम सियासत का बड़ा चेहरा माने जाने वाले मोहम्मद आजम खां आने वाले समय में संकट खड़ा कर सकते हैं। आजम समर्थकों की रविवार को हुई बैठक में अखिलेश यादव के मुखर विरोध के बाद कयास और तेज हो गए हैं कि जेल से बाहर होने पर आजम अपनी पार्टी का ऐलान कर सकते हैं। आजम खां के मीडिया प्रभारी दबी खिन्नता का संकेत तो देते हैं लेकिन फिलहाल साफ-साफ कुछ बोलने को तैयार नहीं। बता दें कि संभल से सपा सांसद डॉ.शफीकुर्रहमान बर्क ने खुलकर कहा था कि सपा ने मुसलमानों के लिए कुछ नहीं किया। हालांकि मुरादाबाद से सपा सांसद डॉ. एसटी हसन फिलहाल इस विवाद से बचते नजर आए।
रामपुर शहर से दसवीं बार विधायक चुने गए मोहम्मद आजम खां समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं। उनके प्रभाव के कारण ही कमोबेश हर चुनाव में सपा न केवल रामपुर बल्कि, आसपास के जिलों में मजबूती से खड़ी रहती है। इस बाद विधानसभा चुनाव के बाद माहौल कुछ बदला-बदला है। शानू का कहना है कि आजम समर्थक एकजुट हैं। हमने लोकतांत्रिक ढंग से पार्टी की बैठक में अपनी बात रखी है। पार्टी के इतने बड़े नेता की मुश्किल घड़ी में पार्टी मुखिया अखिलेश यादव की भूमिका संतोषजनक नहीं रही।
नई नहीं है आजम की सपा से नाराजगी
मोहम्मद आजम खान की सपा से नाराजगी कोई पहली बार नहीं है। इसके पहले भी वह नाराज होकर वह 13 साल पहले पार्टी छोड़ चुके हैं, लेकिन जब उन्हें मनाया गया तो वह वापस आ गए। वर्ष 2009 के चुनाव में अमर सिंह के कहने पर मुलायम सिंह यादव ने रामपुर से जया प्रदा को लोकसभा चुनाव लड़ा दिया। आजम इससे इतना गुस्सा हुए कि सपा से नाता तोड़कर अलग हो गए। आजम इसलिए नाराज बताए जा रहे हैं कि अखिलेश सिवाय एक बार के उनसे जेल में मिलने नहीं गए। शिवपाल भी इससे पहले अखिलेश से नाराजगी जता चुके हैं।

0 Comments