लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव कराने को लेकर रस्साकशी जारी है। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। लखनऊ हाई कोर्ट ने सूबे में मौजूदा ग्राम प्रधानों का कार्यकाल छह महीने के लिए आगे बढ़ाने के राज्य सरकार के फैसले पर नाराजगी जताई है। साथ ही राज्य निर्वाचन आयोग पर तीखे सवाल उठाए हैं। हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग को साफ निर्देश दिया है कि सरकार अदालत को बताए कि उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव किस तारीख को कराए जाएंगे।
इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने ग्राम प्रधानों का कार्यकाल छह महीने बढ़ाए जाने पर सख्त रुख अपनाया। इसके अलावा कोर्ट ने पंचायत चुनाव की तारीख को लेकर सवाल उठाया। हाई कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग से चुनाव तारीख बताने को कहा है। 10 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर ओबीसी आयोग की रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने का निर्देश सरकार को दिया है।
बता दें कि सरकार के ग्राम प्रधानों के कार्यकाल को छह महीने तक बढ़ाए जाने के फैसले को चुनौती दी गई है। हाई कोर्ट ने सरकार की ओर दी गई दलीलों को पूरी तरह से स्वीकार नहीं किया है। याचिकाकर्ता अमरेंद्र नाथ ने बताया कि सुनवाई के दौरान सरकार से सवाल किया गया कि यूपी पंचायत चुनाव कब कराए जाएंगे। हाई कोर्ट ने अगली सुनवाई पर सरकार से चुनाव तारीख बताने को कहा है। साथ ही ओबीसी रिपोर्ट भी पेश करने को कहा है।
उत्तर प्रदेश में प्रधानों का कार्यकाल 26 मई को खत्म हो चुका है, लेकिन सरकार ने चुनाव देरी से होने के कारण प्रधानों का कार्यकाल अगले 6 महीने के लिए बढ़ा दिया है। ग्राम प्रधान अब प्रशासनिक कार्यों के लिए प्रशासक के रूप में काम रहे हैं।