...एक बार फिर आजमगढ़ियों ने साबित किया कि हम राजनैतिक धारा के विपरीत


mj vivek
आजमगढ़। आजमगढ़-मऊ विधान परिषद चुनाव परिणाम ने एक बार फिर साबित कर दिया की यहां के लोग राजनैतिक धारा के विपरीत चलने वाले है। इस चुनाव में सपा के गढ़ में निर्दलीय उम्मीदवार विक्रांत सिंह रिषु की बड़ी जीत ने सबको चौका कर रख दिया। कारण अभी हाल में ही संपन्न हुए विधान सभा के चुनाव में समाजवादी पार्टी ने आजमगढ़ की दस सीटों पर विजयी पताका लहराया था। वह भी तब जब पूरे प्रदेश में योगी सरकार के सुशासन, राशन और बुलडोजर की धमक की बयार चल रही थी।

वर्ष 2014 के लोक सभा चुनाव में जब पूरे देश में मोदी मैजिक की लहर चल रही थी तो यहां के लोगों ने समाजवादी विचारधारा के पुरोधा मुलायम सिंह यादव को जीत का हार पहनाया था। तब यहां के स्थानीय बाहुबली नेता भाजपा प्रत्याशी पूर्व सांसद रमाकांत यादव को करारी हार मिली। वही साल 2017 के विधान सभा चुनाव में भी पूरे प्रदेश में भाजपा की लहर चल रही थी तो यहां के लोगों ने भाजपा को सिर्फ एक सीट फूलपुर ही दी थी। तब समाजवार्दी पार्टी के पांच सीटों पर कब्जा जमाया था और बहुजन समाज पार्टी को चार सीटों को विजयी मिली थी।

वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में भी हम आजमगढ़ियों ने मोदी मैजिक की जगह सपा-बसपा गठबंधन के प्रत्याशी पूर्व सीएम अखिलेश यादव को चुना था। इस चुनाव में सपा प्रमुख ने अभिनेता से नेता बने भोजपुरी सुपर स्टार दिनेश लाल यादव निरहुआ को हराया था। जिले की दूसरी सीट लालगंज पर भी भाजपा को करारी हार मिली थी। यहां भाजपा प्रत्याशी पूर्व सांसद नीलम सोनकर को बसपा की वर्तमान सांसद संगीता आजाद ने हराया था।

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