जय प्रकाश पांडेय
भारत किसानों और नौजवानों का देश है। यहां दस करोड़ किसान परिवार तथा पच्चीस वर्ष से कम उम्र के युवाओं की तादात पैंतीस करोड़ हैघ्।महज संख्या की दृष्टि से इन्हें अपने वर्ग में विश्व के सबसे बड़े समूह के रूप में रेखांकित करना, इनके तारीखी सफरनामे के सघन इतिहास का इकहरा पाठ करना होगा। आजादी के संग्राम में भी किसानों और युवाओं की ऊर्जावान भागीदारी ने वह ताकत पैदा की जिससे गुलामी की बेड़ियों को तोड़ने में कामयाबी हासिल हुई। 1947 के बाद की हर बड़ी राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल में किसान और नौजवान सबसे आगे रहे। अत्याचारी भाजपा सरकार द्वारा थोपे गए काले कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों ने अभूतपूर्व साहस के साथ अथक लोकतांत्रिक प्रतिरोध किया।इस सरकार के दमन , झूठे मुकदमे, जेल किसानों के हौसले को पस्त न कर सका घ्, न ही सरकार पोषित मीडिया किसानों को देशद्रोही, खालिस्तानी कह कर आंदोलन के विमर्श को बदल सकी।यह किसानों की एकताऔर संघर्षशीलता ही थी, जिसने इस निरंकुश शासन को घुटने पर ला दिया उसे तीनों विवादित कानूनों को वापस लेना पड़ा। यह भाजपा के अहंकारी नेतृत्व के राज्य प्रायोजित आतंक पर जनता के ताकत की जीत है। आज उत्तर प्रदेश में सरकार की गलत नीतियों के कारण किसान नौजवान अपने वजूद की लड़ाई लड़ रहा है। ऐसे में समाजवादी पार्टी का श्अन्नसंकल्पश् इस लड़ाई में युद्ध जैसा नैतिक उत्साह पैदा करेगा। उत्तर प्रदेश बाबा रामचंद्र, मदारी पासी, स्वामी सहजानंद के ऐतिहासिक किसान आंदोलनों का साक्षी रहा है। डॉक्टर लोहिया, आचार्य नरेंद्रदेव, जेपी और चौधरी चरण सिंह आदि सभी समाजवादियों ने किसान आंदोलन को सक्रिय समर्थन दिया। श्अन्न संकल्पश् मूलतरूअवध के एका किसान आंदोलन , स्वामी सहजानंद की किसान सभा के आंदोलन और महेंद्र सिंह टिकैत के संघर्षों का विस्तार है ।यह अन्न -संकल्प इन महान किसान नेताओं के अधूरे सपनों को पूरा करने की समाजवादी प्रतिज्ञा है।
2022 तक किसानों की आय दोगुना करने की घोषणा हकीकत की खुरदुरी जमीन पर जुमला साबित हुई है। कारपोरेट नियंत्रित भाजपा सरकार किसानों को मनुष्य नहीं सस्ते मजदूर के तौर पर देखती है। ध्यातव्य है कि विश्व बैंक ने 1996 एवं 2008 में भारत की ग्रामीण आबादी में से चालीस करोड़ को नगरों की ओर खदेड़ने का स्पष्ट निर्देश प्रस्तुत किया था। इस सरकार पर विश्व बैंक का दबाव सर्वविदित है। 1977 में सरकार ने 807 वस्तुओं को लघु एवं कुटीर उद्योगों के लिए संरक्षित रखा था ,जिन्हें आर्थिक सुधारों के क्रम में पूर्णतः हटा दिया गया है जबकि अनेक स्तरों पर इस आरक्षण की आवश्यकता है। उत्तर प्रदेश में एक करोड़ सतहत्तर लाख परिवार कृषि से जुड़े हैंघ्, जिनकी औसत आय 8061 रुपया प्रतिमाह है जो पंजाब के किसान परिवार की आय (26700 )एक की एक तिहाई से भी कम है । अस्सी प्रतिशत किसान घाटे की खेती के कारण प्रवासी पंछियों की तरह महानगरों में प्रवास के बिना जीवन यापन नहीं कर सकते।किंतु शहरों में भी मन्दी कारण रोजगार संकट बढ़ा है। यह अकारण नहीं है कि किसानों के साथ अब नौजवानों की आत्महत्या भी नियति बन रही है। एनसीआरबी 2018 के आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष 10349 किसानों ने आत्महत्या की । वहीं बेरोजगारी से तंग आकर 12936 युवाओं ने आत्महत्या कर ली। जाहिर है सरकार की नीतियों ने किसानों और नौजवानों को सर के बल खड़ा कर दिया है। समाजवादी पार्टी ने सरकार बनने पर मुफ्त सिंचाई, 300 यूनिट बिजली मुफ्त, गन्ना किसानों को पन्द्रह दिन के भीतर भुगतान करने एवं किसानों की सभी फसलों को एमएसपी के दायरे में लेकर पारदर्शी ढंग से क्रय केंद्रों द्वारा खरीदने की घोषणा की है जो वृहत्तर अर्थों में अन्न- संकल्प मे समाहित है। यह अन्न संकल्प किसानों, नौजवानों को फिर से अपने पैरों पर खड़ा करेगा और उन्हें सम्मान पूर्ण जीवन जीने की ताकत देगा।
डॉ राम मनोहर लोहिया के समाजवादी समाज की संकल्पना मूलतः समानता, स्वतंत्रता और संपन्नता जैसे प्रगतिशील मूल्यों पर आधारित थी। इन्हीं मूल्यों की स्थापना के लिए उन्होंने सप्तक्रांति का आवाहन किया। उनकी सप्तक्रांति में लिंगभेद, रंगभेद,जातिभेद ,अर्थभेद ,भाषाभेद, शस्त्रभेद एवं साम्राज्यवादी शासन एवं सोच के भेद का सभी स्तरों पर प्रतिरोध है। डॉक्टर लोहिया के वैचारिक जागरण एवं उनके संघर्षों की दाखिल खारिज समाजवादी पार्टी का अन्न संकल्प सप्तक्रांति का घोषणापत्र है। अन्न संकल्प किसानों के साथ न्याय एवं उनके सशक्तिकरण की प्रक्रिया है जो सप्त क्रांति के सभी स्तरों को स्पर्श करती है। किसान भारतीय संदर्भ में वर्ग/ वर्ण के स्तर पर पिछड़े, दलित, वंचित के बहुसंख्यक वर्ग का प्रतिनिधित्व करता है। इसलिए एक ओर किसान सशक्तिकरण जाति बंधन को शिथिल करता है ,दूसरी तरफ आर्थिक विषमता को कम करेगा तीसरी ओर वर्तमान में कृषि पशुपालन ,बागवानी में महिलाओं की प्रमुखता के कारण यह लिंग भेद को भी शिथिल करेगा। राजनीति का स्तर पर मजबूत किसान ,मजबूत गांव लोहिया के चौखंभा राज की गांव सरकार का स्वप्न साकार करने में सक्षम होगा। संपन्न एवं सशक्त किसान सांस्कृतिक का स्तर पर महानगरों के सापेक्ष लोक संस्कृति, लोक भाषा के प्रति आत्मगौरव के बोध के कारण पश्चिमी संस्कृति और भाषा की गुलामी के बरक्स मजबूती से खड़ा होगा।
भारतीय किसान अपने कठिन जीवन संघर्षों के बल पर विपरीत हालात में भी 2020-21मे रिकॉर्ड 303 मिलियन टन का खाद्यान्न की पैदावार की है। आजकल चर्चित खाध-तेल के स्तर पर भी ध्यातव्य है कि किसानों ने नव्बे दशक में ही भारत को खाद्य -तेल में लगभग आत्मनिर्भर बना दिया था। किंतु कांग्रेस, भाजपा की और अदूरदर्शी उदारवादी सोच के कारण आज भारत विश्व का सबसे बड़ा खाद्य- तेल आयातक राष्ट्र है। 65000 करोड़ रूपया सालाना इसके आयात खर्च है। सरकार ने एक भी विश्वस्तरीय तिलहन फसलों के अनुसंधान संस्थान की स्थापना नहीं की है, न हीं तिलहन उत्पादक किसानों को संरक्षण एवं सहायता दी है ।अन्यथा अकेले बुंदेलखंड की भूमि और ब्रज के अर्ध शुष्क क्षेत्र का खाद्य- तेल में आत्म निर्भरता दिला सकते हैं।आज सकल घरेलू उत्पाद में कृषि की हिस्सेदारी 17ः रह गई है ।किंतु आज भी कुल श्रमशक्ति का 56ः हिस्सा कृषि या उसके संबंध क्षेत्र में नियोजित है। पहले ही जनसंख्या का दबाव झेल रही भारतीय कृषि वर्तमान (2020 )में तीन दशकों की सर्वाधिक बेरोजगारी दर 7ः होने तथा यूएनडीपी के अनुसार केवल 2021 में ही छरूकरोड़ भारतीयों को मध्य वर्ग से निकालकर गरीबी रेखा के नीचे धकेलने का कार्य भी सरकारी अक्षमता से संपन्न हुआ है। ऐसे हालात में खेती- किसानी पर अतिरिक्त दबाव बढ़ा है । वहीं सरकार की कृपा से कोरोना त्रासदी की अवधि में भी अरबपतिअमीरों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। यह अमीरी किसानों ,नौजवानों के हक पर डकैती से पैदा हुई ।कवि धूमिल ने श्रोटी और संसदश् कविता में लिखा है - श्एक आदमी रोटी बेलता है, एक आदमी रोटी खाता है ,एक तीसरा आदमी भी है, जो न रोटी बेलता है न रोटी खाता है, वह सिर्फ रोटी से खेलता है।श्किसानों नौजवानों की रोटी से खेलने वाले इस तीसरे व्यक्ति के खिलाफ लोकतांत्रिक युद्ध की प्रस्तावना है- समाजवादी अन्न संकल्प। महान किसान नेता स्वामी सहजानंद ने श्रोटी को भगवान का दर्जा दियाश् और रोटी पैदा करने वाले अन्नदाता को भगवान से भी ऊपर की उपाधि दी। समाजवादी अन्न- संकल्प रोटी छीनने वालों के बरक्स श्समाजवादी अन्न सेनाश् के खड़े होने का संकल्प है तो दूसरी ओर किसानों ,नौजवानों को सहजानंद के परिकल्पना की उच्च भूमि पर प्रतिष्ठित करने की प्रतिबद्धता है।
0 Comments