सहायक प्रोफेसर को अकारण निकाले जाने को लेकर तीसरे दिन भी जारी मौन व्रत

शिब्ली नेशलन कालेज में (गेस्ट फैकल्टी) के रूप कार्यरत रही डा. इफ्कत जहां 



आजमगढ़। नगर के पहाड़पुर स्थित शिब्ली नेशनल कॉलेज में डॉक्टर इफ्कत जहां तदर्थ सहायक प्रोफेसर (गेस्ट फैकल्टी) प्राणी विज्ञान विभाग को अकारण शिक्षकों की सूची में सम्मिलित न किए जाने एवं शिब्ली कॉलेज से डॉक्टर इफ्कत जहां को बिना किसी कारण के निकाले जाने को लेकर शिब्ली कॉलेज के प्रबंध समिति के सदस्यों का मौन व्रत आज तीसरे दिन भी जारी रहा। प्रबंध समिति के सदस्य वसीउद्दीन एडवोकेट ने कहा कि समिति के अध्यक्ष शौकत अली वाह महाविद्यालय की प्रबंध समिति के अध्यक्ष अबुसाद शमसी द्वारा दिया गया वक्तव्य पूर्ण रूप से झूठ है। महाविद्यालय में बहुत से प्रवक्ताओं का नाम विभिन्न महाविद्यालयों में मौजूद है। व्यक्तिगत प्रवेश में ही इफ्कत जहां को निकाला गया है। डॉक्टर इफ्कत जहां महाविद्यालय के प्राणी विज्ञान विभाग में तदर्थ सहायक प्रोफेसर (गेस्ट फैकल्टी) के पद पर बीते 11 वर्षों से कार्यरत थी। जिनका नाम प्रबंध समिति चयन समिति ने दो बार स्थाई सहायक प्रोफ़ेसर के पद पर प्रस्ताव कर विश्वविद्यालय को अनुमोदन कर भेजा है। बीते वर्ष 2020/ 21 में तदर्थ शिक्षकों की संख्या 56 थी। नए सत्र 2021/ 22 में तदर्थ शिक्षकों की संख्या महाविद्यालय प्रशासन ने 56 के स्थान पर 79 कर दी है जिस संबंध में न तो कोई सूचना दी गई ना ही किसी अभ्यर्थी द्वारा कोई प्रार्थना पत्र ही दिया गया सभी नियुक्तियां महाविद्यालय प्रशासन ने अपनी सुविधा के अनुसार कर ली है तदर्थ शिक्षकों की सूची में आधे से अधिक अभ्यर्थी महाविद्यालय में शिक्षा कार्य करने हेतु शैक्षणिक योग्यता नहीं रखते।

 वसीउद्दीन एडवोकेट वस्सू ने आगे कहा कि डॉक्टर इफ्कत जहां का नाम नई सूची में सम्मिलित नहीं किया गया है जब कि डॉक्टर इफ्कत जहां तदर्थ शिक्षकों में जेष्ठ होने के साथ साथ विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा जारी निर्धारित शैक्षणिक योग्यता रखती हैं जानबूझकर एक महिला शिक्षिका से भेदभाव व प्रताड़ित करने की नियत से यह कार्य किया गया है जो महिला प्रताड़ना की श्रेणी में आता है तथा किसी प्रकार उचित नहीं है। इस अवसर पर अलाउद्दीन एडवोकेट, अब्दुर्रहमान एडवोकेट, मंतराज यादव, पुरुषोत्तम राम, मो0आरिफ, मोहम्मद रजीं जयराजपुरी, मोहम्मद अफजल, अजमल हुसैन, एजाज अहमद, महमूद अहमद, आदि लोग उपस्थित थे।

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