आजमगढ़। आजकल बच्चों में रफ भाषा बोलना ,झुंड में रहकर कुछ गलत बातें करना ,अपने भविष्य की चिंता न करते हुए फर्जी बिंदास्पन्ति का नाटक करना एक फैशन हो गया है। ऐसे में प्रबुध्द वर्ग को बीड़ा उठाने की जरूरत है ताकि समाज को संस्कारित किया जा सके उक्त विचार श्री नरोत्तम ब्रह्म इण्टर कॉलेज सुन्दरपुर प्रधानाचार्य डॉ0 रामजनम दुबे ने व्यक्त की। उन्होंने बताया कि आज की स्थितियां बहुत कुछ परिवर्तित हो रही है, परिवर्तन संसार का नियम है जो होना भी चाहिए किन्तु कष्ट तब होता है जब हम तथाकथित पढ़ाई का झांसा देकर सबको गुमराह करने के साथ-साथ अपने घर वालों को भी घोर अंधकार में रखते हुए अपने घमण्ड की सिंचाई करते हुए यह भूल जाते हैं कि वास्तव में हमारा कर्तव्य क्या है। हम हर पल अपने अधिकारों की दुहाई देते हुए अपने माँ बाप तथा बड़ों से अपने को अच्छा लगने वाला हर कार्याे को करा लेते हैं किंतु मां बाप तथा बड़ों की कोई भी एक अदद इच्छा पूरा नहीं कर पाते हैं। उन्होंने बताया कि बिलरियागंज में एक ख्यातिलब्ध स्कूल के सामने से गुजर ही रहा था कि अचानक चार पाँच बच्चों के आपस मे मंत्रणा जोर जोर से मेरे कानों तक पहुँची तथा मैं अपने को रोक नही पाया, जाकर उनसे ऐसा न करने के लिए कहा परंतु एक छात्र ने कहा ऐ अंकल आपको जब कोई कुछ नही बोला है तो आप जाइये किन्तु बात मुझे कचोटती रही और मैं उन बच्चों को उस विद्यालय के एक शिक्षक तक ले गया जहाँ वो सभी बच्चे कुछ गलती का एहसास करते हुए नज़र आये। यदि मैं कुछ नही बोलता तो शायद वे सभी इस तरह की अभद्र भाषा रोज आपस मे बोलते जिससे ओर बच्चोँ में भी संस्कार की कमी होती। यह हम सब पर निर्भर करता है कि हम समाज मे हो रहे छोटी सी गलती को सुधारने का प्रयत्न कर रहें हैं कि नही यदि कर रहे हैं तो शायद बहुत बड़ी उपलब्धि समाज को दे सकते हैं। हम प्रबुद्ध लोग यदि सड़क पर तक हो रहे इस तरह की छोटी छोटी गलतियों को दूर कर बच्चों में संस्कार भर दें तो बहुत कुछ सकारात्मक बदलाव अपने आप होने लगेगा ,क्योकि जहां नही है संस्कार ,वहां सब कुछ है बेकार।

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