लाखों रुपये की लागत से बना सांस्कृतिक मंच खंडहर में तब्दील
अश्विनी कुमार सिंह
मधुबन/मऊ।
अभी न तो ढोलक की थाप ही सुनाई दी और न हारमोनियम से संगीत के मधुर सुर
निकले उसके पहले ही लाखों रुपये की लागत से बना सांस्कृतिक मंच खंडहर में
तब्दील हो गया।अब वो जगह आवारा पशुओं की शरणगाह बनकर रह गया है।पूरे परिसर
में जंगली घासों ने कब्जा जमा लिया है।ऊंची ऊंची घासों के बीच कीड़े मकोड़ो
और खतरनाक कीटों ने अपना घर बना लिया है। करोड़ो की जमीन और सांस्कृतिक मंच
लोगों के लिए अब निष्प्रयोज्य साबित हो रहा है। बता दे पूर्व की बसपा सरकार
में गांव में संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को बढ़ावा देने के लिए
गांवों में सांस्कृतिक मंच का निर्माण कराया गया था। इसी कड़ी में पूर्व बसपा
विधायक उमेशचंद्र पांडेय जो अब समाजवादी पार्टी में शामिल हो चुके हैं ने
तहसील मधुबन अंतर्गत ग्रामसभा कटघरा शंकर में सब्जी मंडी तिराहे के पास
करोड़ो रुपये की भूमि में 25 लाख रुपये की भारी भरकम लागत से स्वीकृत कराया
जो कई वर्षों में बनकर तैयार हुआ।जिसमें तीन कमरे आगे मंच शौचालय आदि शामिल
है। लेकिन उसी के साथ उसकी बदनियती भी शुरू हो गई।कुछ दिन बाद ही आई आंधी
से मंच के सारे टीनशेड उड़कर धराशाई हो गए।फिर सालों बाद उस पर सीमेंट की
चादर डाली गई लेकिन वह भी कुछ दिन बाद टूट कर खराब हो गई।पूरा मंच उसकी
टूटी फूटी कोठरियां भी जीर्ण शीर्ण होकर रह गए। नतीजतन अभी इस मंच पर
हारमोनियम की सुरीली आवाज और ढोलक की थाप सुनाई भी नहीं दी कि सांस्कृतिक
मंच पूरी तरह टूटकर बिखर गया।किसानों के खून पसीने और टैक्स के पैसे 25 लाख
रुपये हमेशा हमेशा के लिए डूब गए। वर्तमान में अब यह सुनसान जगह केवल
आवारा पशुओं और आवारा लड़कों की ऐशगाह से लेकर चरागाह बनकर रह गई है। वर्षो
से इस चार एकड़ भूमि पर अगल बगल के किसानों द्वारा कब्जा किया जाता रहा है।
एक किसान से तो दो बार प्रशासन ने डंडे के बल पर जमीन खाली कराई लेकिन उसके
बाद प्रशासन की ही लापरवाही के कारण पुनः उस पर कब्जा हो गया है।रात को
क्या दिन के उजाले में भी इस जगह पर जाना नामुमिकन सा लगता है।कई बार
स्थानीय सब्जी विक्रेताओं की तरफ से इस जगह को सब्जी मंडी के रूप में
विकसित करके क्षेत्र के सब्जी विक्रेताओं और उत्पादकों को सौगात देने की
मांग उठाई लेकिन न तो क्षेत्रीय मंत्री दारा सिंह चौहान ने कोई पहल की और न
ही प्रशासन ने अभी तक कोई कदम उठाया जिससे करोड़ो रूपये की भूमि और लाखों
रुपये की लागत से बना सांस्कृतिक मंच अब बेकार खंडहर बनकर रह गया है।
स्थानीय लोगों ने इसे सब्जी मंडी बनाये जाने की मांग की है जिससे क्षेत्र
में बड़े पैमाने पर किसानों द्वारा की जा रही सब्जी की खेती को स्थानीय मंडी
में बेचकर उसका लाभ मिल सकें और उस मंच की करोड़ो की जमीन का सद्पयोग हो
सके।

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