डिप्रेशन विश्व की दूसरी सबसे बड़ी बीमारीः डा. डी डी सिंह

मानसिक तनाव के कारण बढ़ रही आत्महत्या की घटनाएं 

आजमगढ़। पूरा देश विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मना रहा है, इस वर्ष इसकी थीम असमान विश्व में मानसिक स्वास्थ्य रखी गई है। मानसिक तनाव के कारण आत्महत्या या हत्या बहुत ही आम होता जा रहा है,जबकि कई मामलों में पीड़ित व्यक्ति के पास पर्याप्त कारण ही नहीं होता। तब भी वह हादसे का शिकार हो जाता है। इस अवसर पर अनौपचारिक बात-चीत में चाइल्ड केयर क्लिनिक के शिशु व बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. डी.डी. सिंह ने बताया कि पूरे विश्व में 3 अरब से ज्यादा लोग डिप्रेशन से ग्रसित हैं और 2.5 अरब से ज्यादा लोग चिंताजनक बीमारी के साथ जी रहे हैं। डिप्रेशन यानि अवसाद का मूल कारण लोगो के अंदर बढ़ रहा तनाव और जीवन का असंतुलित रवैया है । अवसाद के कारण लोगो के जीवन में तनाव का बढ़ना और उनके ऊपर काम, परिवार, पढाई, सामाजिक, आर्थिक  सहित अनेकों प्रकार के दबाव है। चिकित्सकीय भाषा मे शरीर में होमियोस्टैसिस में गड़बड़ी और तनाव के कारण शरीर में कई हार्माेन का लेवल बढ़ जाता है । जिससे लंबे समय तक तनाव अवसाद में तब्दील हो जाता है। उन्होंने ने बताया की  मौजूदा दौर में युवाओं में भी तनाव काफी बढ़ गया है। उनके ऊपर अनेक प्रकार के दबाव के कारण वे चिड़चिड़े हो गए है और समाज और दोस्तों से कटे कटे रहने लगते है । तनाव को 20वी सदी में सिंड्रोम की संज्ञा दी गई है। हार्ट अटैक के बाद डिप्रेशन विश्व की दूसरे नंबर की स्वास्थ्य समस्या है। आज के प्रतिस्पर्धा के युग में लोगो को सफलता पाने की होड़ मची हुई है। जिससे उनमे असफल हो जाने पर हीन भावना उत्पन्न होने लगी है। इसी वजह से डब्लूएचओ ने इस बार की थीम असमान विश्व में मानसिक स्वास्थ्य रखा है, जिसका उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के प्रति लोगों को जागरूक करना और अच्छे मानसिक स्वास्थ्य के लिए प्रेरित करना है। डिप्रेशन से बचने के लिए डॉ. सिंह ने बताया की नियमित व्यायाम, स्वस्थ जीवन शैली, समय का बेहतर उपयोग, खुद और अपने परिवार से प्यार, सही सोच वाले लोगो का साथ, संतुलित नीद, संतुलित भोजन, सुबह शाम टहलना, सोशल साइट्स या इन्टरनेट का कम प्र
योग करना, एकांत में अधिक देर नहीं रहना, अधिक से अधिक खुश रहना और हर पल खुशी की तलाश में रहना। इन सभी को अपने जीवन शैली में उतार कर अवसाद से बचा जा सकता है ।

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