विसर्जन जुलूस में दौड़ा मौत का करंट, दो सगे भाइयों समेत तीन की जान गई

’गोरखपुर में हाईटेंशन तार से टकराई ट्रैक्टर-ट्रॉली की लोहे की रॉड, कई श्रद्धालु झुलसे’ ’बिजली बंद रखने के बावजूद आपूर्ति चालू होने का आरोप, गुस्साए ग्रामीणों ने फोरलेन जाम कर घेरा प्रशासन’



गोरखपुर, दुर्गा प्रतिमा विसर्जन का उल्लास बुधवार शाम उस समय मातम में बदल गया, जब गोरखपुर के गुलरिहा थाना क्षेत्र में विसर्जन जुलूस हाईटेंशन बिजली लाइन की चपेट में आ गया। ट्रैक्टर-ट्रॉली पर लगी लोहे की रॉड तार से टकराते ही पूरे वाहन में करंट दौड़ गया। हादसे में दो सगे भाइयों समेत तीन युवकों की मौत हो गई, जबकि कई महिलाएं और युवक गंभीर रूप से झुलस गए। पांच घायलों की हालत गंभीर बताई गई है। घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने बिजली विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए गोरखपुर-महराजगंज फोरलेन जाम कर दिया।
जानकारी के अनुसार, जंगल अयोध्या प्रसाद के चौहान टोला में स्थापित दुर्गा प्रतिमा को बुधवार शाम करीब पांच बजे ग्रामीण कोलुहा घाट पर विसर्जन के लिए ले जा रहे थे। जुलूस रजही चौराहे के पास पहुंचा ही था कि ट्रॉली की लोहे की रॉड ऊपर गुजर रही 11 हजार वोल्ट की बिजली लाइन के संपर्क में आ गई। देखते ही देखते करंट फैलने से जुलूस में चीख-पुकार मच गई।
हादसे के बाद घायलों को तत्काल बीआरडी मेडिकल कॉलेज पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने चंदन और सगे भाइयों विक्की तथा लक्की को मृत घोषित कर दिया। कई घायलों का उपचार चल रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि विसर्जन जुलूस के मद्देनजर बिजली आपूर्ति बंद रखने की बात कही गई थी। इसके बावजूद जुलूस के रास्ते में बिजली चालू हो गई। सवाल उठ रहा है कि जब श्रद्धालुओं का जुलूस हाईटेंशन लाइन के नीचे से गुजर रहा था, तो बिजली आपूर्ति किसके निर्देश पर शुरू की गई?
घटना से नाराज ग्रामीणों ने शाम करीब छह बजे बीआरडी मेडिकल कॉलेज के सामने गोरखपुर-महराजगंज फोरलेन पर जाम लगा दिया। प्रदर्शनकारियों ने बिजली विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
जिलाधिकारी दीपक मीणा और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. कौस्तुभ मौके पर पहुंचे और आक्रोशित ग्रामीणों तथा मृतकों के परिजनों को समझाने का प्रयास किया। प्रशासन ने मामले में आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिलाया।
’तीन परिवारों पर टूटे दुख के पहाड़ के बीच अब सबसे बड़ा सवाल बिजली आपूर्ति और जुलूस की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर है। ग्रामीण जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। हादसे के वास्तविक कारण और जिम्मेदारी का निर्धारण जांच के बाद ही हो सकेगा।’

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