IAS के अनुभव और जनसत्ता दल की सियासी जमीन के मेल से नए समीकरण की चर्चा, अनुप्रिया पटेल से पुरानी तल्खी ने बढ़ाया सस्पेंस!
Mj Vivek/लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल की एंट्री ने पहले ही हलचल बढ़ा दी थी, अब जनसत्ता दल लोकतांत्रिक की ओर से सामने आए संकेतों ने इस चर्चा को एक नया मोड़ दे दिया है। प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देने के बाद दिव्या मित्तल ने राजनीति में आने का ऐलान तो किया, लेकिन किसी राजनीतिक दल में शामिल होने की घोषणा नहीं की। उन्होंने आम लोगों के साथ मिलकर स्वतंत्र राजनीतिक मंच तैयार करने की बात कही है।
इसी बीच जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के प्रदेश प्रधान महासचिव डॉ. बृजेश सिंह राजावत की ओर से सोशल मीडिया पर एक पोस्ट सामने आई, जिसमें दिव्या मित्तल और पार्टी प्रमुख रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया की तस्वीर के साथ “IAS का अनुभव + राजा भैया की जमीनी पकड़” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया। पोस्ट में दिव्या मित्तल का राजनीतिक पारी के लिए स्वागत भी किया गया। इससे उनके जनसत्ता दल से जुड़ने की अटकलें तेज हुई हैं, हालांकि अभी तक दिव्या मित्तल या पार्टी की ओर से उनके औपचारिक रूप से शामिल होने की घोषणा नहीं हुई है।
सपा का गमछा, जनसत्ता का पोस्टर
दिव्या मित्तल की राजनीति में एंट्री को लेकर इससे पहले समाजवादी पार्टी की ओर से भी संकेत सामने आए। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने उनके राजनीति में आने के संदर्भ में हरे और लाल गमछे का जिक्र किया, जिसे सपा में आने के प्रस्ताव या राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा गया।
कांग्रेस की ओर से भी दिव्या मित्तल को लेकर पहले राजनीतिक रुचि दिखाई गई थी। सितंबर में कांग्रेस नेता अजय राय ने कहा था कि यदि दिव्या मित्तल चुनाव लड़ना चाहें तो पार्टी की ओर से उन्हें टिकट दिए जाने पर विचार किया जा सकता है।
लेकिन जनसत्ता दल का ताजा संकेत इन दोनों से अलग है। यहां सीधे किसी औपचारिक सदस्यता की घोषणा नहीं हुई, बल्कि तस्वीर, स्वागत संदेश और “IAS अनुभव-जमीनी पकड़” के राजनीतिक मेल का संकेत दिया गया है।
असली पेंच मिर्जापुर से जुड़ता है
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे दिलचस्प पहलू मिर्जापुर और अनुप्रिया पटेल से जुड़ी पुरानी राजनीतिक तनातनी है।
2024 लोकसभा चुनाव के दौरान अनुप्रिया पटेल ने कुंडा में एक चुनावी सभा में बिना नाम लिए कहा था कि लोकतंत्र में राजा रानी के पेट से नहीं, बल्कि ईवीएम के बटन से पैदा होता है और कुंडा को अपनी जागीर समझने वालों के भ्रम को तोड़ने का मौका है। इसके बाद राजा भैया ने पलटवार करते हुए कहा था कि ईवीएम से राजा नहीं, बल्कि जनसेवक या जनता का प्रतिनिधि पैदा होता है।
विवाद यहीं नहीं रुका। लोकसभा चुनाव के दौरान जनसत्ता दल लोकतांत्रिक ने मिर्जापुर में सपा प्रत्याशी रमेश चंद बिंद को समर्थन देने का ऐलान किया और पार्टी कार्यकर्ताओं ने अनुप्रिया पटेल के खिलाफ प्रचार भी किया।
हालांकि चुनाव परिणाम में अनुप्रिया पटेल ने जीत दर्ज की। उन्हें 4,71,631 वोट मिले, जबकि सपा के रमेश चंद बिंद को 4,33,821 वोट मिले। जीत का अंतर 37,810 वोट रहा। यह उनका मिर्जापुर से लगातार तीसरा लोकसभा चुनाव था।
इसलिए 2024 के उस घटनाक्रम को आज की दिव्या मित्तल वाली राजनीति से जोड़ते समय यह फर्क महत्वपूर्ण है कि राजा भैया और अनुप्रिया पटेल के बीच राजनीतिक टकराव दर्ज है, लेकिन दिव्या मित्तल को लेकर अनुप्रिया से किसी विवाद को उनके इस्तीफे का कारण मानने की पुष्टि नहीं हुई है।
दिव्या की राह अभी खुली है
दिव्या मित्तल ने अपनी राजनीतिक पारी के लिए उत्तर प्रदेश को कर्मभूमि बताया है, लेकिन उन्होंने अभी यह नहीं बताया है कि वह किस विधानसभा क्षेत्र से सक्रिय राजनीति शुरू करेंगी या चुनाव लड़ेंगी। उन्होंने यह जरूर कहा है कि वह पारंपरिक राजनीतिक दल के बजाय जनता के साथ स्वतंत्र मंच बनाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहती हैं।
यहीं से 2027 के लिहाज से सवाल और बड़ा हो जाता है—क्या दिव्या मित्तल किसी स्थापित दल का हिस्सा बनेंगी, अपना स्वतंत्र मंच खड़ा करेंगी या किसी राजनीतिक गठजोड़ के जरिए चुनावी मैदान में उतरेंगी?
राजा भैया के लिए भी सिर्फ एक चेहरा नहीं?
जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के लिए दिव्या मित्तल जैसी पूर्व नौकरशाह का साथ संभावित रूप से संगठन और राजनीति में एक अलग तरह का चेहरा जोड़ सकता है। दूसरी तरफ दिव्या के लिए किसी राजनीतिक संगठन के साथ जाना उनके स्वतंत्र मंच वाले घोषित रुख से अलग दिशा होगी।
यही वजह है कि अभी तस्वीर साफ नहीं है।
एक तरफ IAS का प्रशासनिक अनुभव, दूसरी तरफ राजा भैया की क्षेत्रीय राजनीतिक पकड़ और तीसरी तरफ 2027 का विधानसभा चुनाव—इन तीनों को जोड़कर सोशल मीडिया पर नई राजनीतिक पटकथा लिखी जा रही है।
लेकिन फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है—
दिव्या मित्तल की राजनीतिक पारी आजमगढ़, मिर्जापुर, प्रतापगढ़ या किसी और सीट से शुरू होगी? इसका जवाब अभी उनके पास है।
और जब तक वह जवाब सामने नहीं आता, राजा भैया के साथ सामने आई तस्वीर को राजनीतिक संकेत तो माना जा सकता है, लेकिन औपचारिक गठजोड़ या पार्टी में शामिल होने की घोषणा नहीं।

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