लखनऊ/अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच में विशेष जांच दल (एसआईटी) को कई नए सुराग मिले हैं। जांच में सामने आया है कि आरोपी कथित तौर पर चोरी छिपाने के लिए सीसीटीवी फुटेज से छेड़छाड़ करने और उन्हें हटाने की कोशिश करते थे। पुलिस का कहना है कि जांच के लिए आवश्यक फुटेज सुरक्षित हैं और उन्हें साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
जांच के अनुसार, चढ़ावे की गणना के दौरान आरोपियों को कैमरों की स्थिति की जानकारी रहती थी। पुलिस का दावा है कि रकम निकालते समय आरोपी एक-दूसरे को इस तरह घेरकर खड़े होते थे कि उनकी गतिविधियां कैमरे में स्पष्ट रूप से दर्ज न हो सकें। पूछताछ में यह भी सामने आया कि कुछ आरोपी कई बार कंट्रोल रूम तक पहुंचे और सीसीटीवी रिकॉर्डिंग से छेड़छाड़ की। इसी कारण कंट्रोल रूम में तैनात कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी अविनाश शुक्ला ने पूछताछ में बताया कि चोरी की गई रकम सभी आरोपियों के बीच बांटी जाती थी। उसका यह भी दावा है कि रकम का बंटवारा अयोध्या के 14 कोसी परिक्रमा मार्ग पर भीखापुर के पास स्थित एक बाग में किया जाता था। पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर उक्त स्थान का निरीक्षण भी किया।
जांच के दौरान पुलिस ने एक हॉस्टल में स्टील की टंकी में काली पन्नी में रखी नकदी बरामद करने का भी दावा किया है। इस बरामदगी की वीडियोग्राफी कराई गई है। इसके अलावा पुलिस ने अविनाश शुक्ला की निशानदेही पर कथित तौर पर चोरी की रकम से खरीदी गई एक ब्रेजा कार और निवेश से जुड़े दस्तावेज भी बरामद किए हैं। इससे पहले उसके पास से 20.39 लाख रुपये नकद और एक हजार अमेरिकी डॉलर बरामद किए जाने की जानकारी भी पुलिस दे चुकी है।
एसआईटी ने मामले में अब तक कई लोगों से पूछताछ की है। इनमें मंदिर ट्रस्ट से जुड़े लोग, बैंक अधिकारी, सुरक्षा कर्मी तथा वित्तीय लेनदेन से जुड़े अन्य व्यक्ति शामिल हैं। पुलिस बैंक लेनदेन, ऑडिट रिकॉर्ड और संपत्ति संबंधी दस्तावेजों की भी जांच कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, ऑडिट प्रक्रिया और वित्तीय प्रबंधन में कुछ संभावित अनियमितताओं की भी जांच की जा रही है।
उधर, राम मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों से भी दस्तावेज लेकर पूछताछ की गई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि चोरी की घटनाएं कितने समय से चल रही थीं, इसमें किन-किन लोगों की भूमिका थी और क्या इसमें किसी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत हुई।
फिलहाल मामले की जांच जारी है। आरोपियों के विरुद्ध अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया और एसआईटी की जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।

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