अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) शुक्रवार को अपनी विस्तृत रिपोर्ट शासन को सौंप सकती है। रिपोर्ट में चढ़ावा गणना व्यवस्था में अनियमितताओं, मंदिर प्रबंधन से जुड़े कुछ पदाधिकारियों की भूमिका और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए महत्वपूर्ण सिफारिशें शामिल होने की संभावना है।
शासन ने 13 जून को तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था, जिसमें लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी रेंज किरण एस. और विशेष सचिव वित्त नील रतन शामिल हैं। एसआईटी ने 23 जून को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी थी, जिसके आधार पर एफआईआर दर्ज हुई, आरोपियों की गिरफ्तारी हुई और ट्रस्ट के तत्कालीन पदाधिकारी चंपत राय व डॉ. अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया था। बाद में विस्तृत जांच के लिए टीम की समयसीमा 15 जुलाई तक बढ़ाई गई थी।
सूत्रों के अनुसार अंतिम रिपोर्ट में चढ़ावा प्रबंधन में हुई गड़बड़ियों के साथ-साथ जिम्मेदार लोगों की भूमिका का भी उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट मिलने के बाद शासन आगे की कार्रवाई पर निर्णय लेगा।
मुख्य आरोपियों की कस्टडी रिमांड की तैयारी तेज
दूसरी ओर, मामले में गिरफ्तार दो आरोपियों की कस्टडी रिमांड समाप्त होने के बाद अब पुलिस का पूरा फोकस मुख्य आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू और मनीष यादव पर है। दोनों से चोरी की रकम, उसके निवेश और पूरे नेटवर्क के बारे में पूछताछ के लिए कस्टडी रिमांड की तैयारी की जा रही है।
बुधवार देर रात कस्टडी रिमांड पूरी होने पर सुभाष श्रीवास्तव और रमाशंकर मिश्रा को दोबारा जिला जेल भेज दिया गया। इसके बाद गुरुवार सुबह विवेचक आशुतोष तिवारी ने जेल पहुंचकर टिन्नू और मनीष यादव से करीब डेढ़ घंटे तक पूछताछ की।
जमीन और निवेश की जांच में मिले अहम सुराग
जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों से संपत्तियों और चोरी के धन के निवेश को लेकर पूछताछ की। सूत्रों के मुताबिक टिन्नू की कुछ जमीनों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी मिली है, जिसका राजस्व विभाग के रिकॉर्ड से मिलान कराया गया है। पुलिस को कुछ नई बरामदगी और अन्य लोगों की संभावित संलिप्तता से जुड़े इनपुट भी मिले हैं, जिनका सत्यापन जारी है।
जांच एजेंसियों का मानना है कि यदि मुख्य आरोपियों की कस्टडी रिमांड मिलती है तो चढ़ावा चोरी के पूरे नेटवर्क, धन के इस्तेमाल और मामले से जुड़े अन्य तथ्यों का खुलासा हो सकता है।

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