गाजीपुर लोकसभा उपचुनाव में ओम प्रकाश राजभर के बेटों पर दांव चल सकती हैं भाजपा...गठबंधन को लेकर हलचल तेज!


लखनऊ। बीजेपी अभी सुभासपा के साथ गठबंधन की पहली शर्त पर मंथन कर रही है। 2016 में भाजपा सुभासपा गठबंधन के पीछे भी अमित शाह का ही हाथ था। माना जा रहा है कि गाजीपुर लोकसभा सीट पर उपचुनाव की घोषणा के साथ ही भाजपा-सुभासपा गठबंधन के साथ राजभर के बेटों को प्रत्याशी बनाए जाने का एलान भी किया जा सकता है। गाजीपुर में राजभर बिरादरी के सवा तीन लाख वोट हैं। गाजीपुर जिले की एक सीट जहूराबाद से खुद ओम प्रकाश राजभर विधायक हैं।

गाजीपुर लोकसभा सीट में सात विधानसभा सीटें आती हैं जिनमें से पांच सीटें सपा और दो सीटें राजभर के पास हैं। जबकि बीजेपी के पास एक भी सीट नहीं हैं। 2019 लोकसभा चुनाव में भी बसपा प्रत्याशी अफजाल अंसारी के सामने भाजपा चुनाव हार गई थी। बीजेपी की अभी-अभी बनी आंतरिक रिपोर्ट में गाजीपुर में बीजेपी के पक्ष में माहौल नहीं दिखाई दे रहा है। वहीं बीजेपी नेता मनोज सिन्हा भी गाजीपुर से चुनाव नहीं लड़ना चाहते हैं। ऐसे में बीजेपी इस बात पर मंथन कर रही है कि इस सीट पर छड़ी के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ाया जाए या कमल के निशान पर।

अमित शाह भाजपा के चुनाव चिन्ह पर गाजीपुर में चुनाव लड़ाना चाहते हैं। इसी मसले पर 2019 का भाजपा-सुभासपा गठबंधन टूटा था। राजभर लगातार इस मामले पर दबाव बनाते आए हैं। सूत्रों की माने तो ब्रजेश पाठक और दयाशंकर सिंह की जोड़ी ने राजभर को भाजपा निशान पर लड़ने के लिये लगभग मना चुके हैं। भाजपा हाईकमान इस चुनाव को राजभर वोटों के साथ सुभासपा की परीक्षा के तौर पर देख रही है। इसके बाद राजभर के लोकसभा चुनाव में सीटों के दावों पर भी विचार होगा। सुभासपा यूपी में तीन और बिहार में एक सीट पर लोकसभा में अपना दावा कर रही है। इस बार अफ़जाल के परिवार से कोई सदस्य सपा से चुनाव लड़ सकता है।

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