जेठानी की इस बात से जलती थी देवरानी!
शादी से कुछ महीने पहले ही अशरफ जेल से छूटकर आया था। अतीक ने धूमधाम से अपने भाई की शादी की। चकिया वाली कोठी में जैनब ब्याह के बाद आई। अशरफ और जैनब के वैवाहिक जीवन की शुरुआत चकिया वाले पैतृक घर से हुई। यह सुखद दौर कुछ ही दिन चला। घर में शाइस्ता का हुकूमत चलती थी। बच्चों से लेकर नौकरों तक, गुर्गों से लेकर रिश्तेदारों तक सब शाइस्ता के आगे नतमस्तक थे। यहां तक कि शाइस्ता की बात काटने की हिम्मत अशरफ में भी नहीं थी। जैनब ने कुछ दिन तो बर्दाश्त किया, फिर देवरानी-जेठानी में छोटी-छोटी बातों को लेकर मतभेद होने लगे।
अशरफ और अतीक तक भी बातें आने लगीं। दोनों ने काफी प्रयास किया, लेकिन धीरे-धीरे शाइस्ता और जैनब में बोलचाल बंद हो गई। शादी के कुछ महीने के बाद जैनब अपने मायके हटवा चली गई और वहीं अपने भाइयों के परिवार के साथ रहने लगी। इसके बाद वह जब भी चकिया आई, मेहमान की तरह। यानी, बस कुछ घंटों के लिए। वह हटवा की ही होकर रह गई। अशरफ का भी ज्यादातर समय हटवा में बीतने लगा। जैनब के चारों बच्चे मायके में ही हुए। उनकी वहीं पर परवरिश भी हो रही है।
ऐसा नहीं कि जैनब, अतीक या उसके बेटों से चिढ़ती थी। अतीक के बेटे अक्सर उससे मिलने भी जाते थे। लेकिन, शाइस्ता से उसकी मुलाकात सिर्फ शादी ब्याह में ही होती थी। जैनब और शाइस्ता की आपस में कभी नहीं पटी2017 के बाद जब अशरफ दोबारा फरार हुआ तो भी वह अक्सर हटवा में ही आकर रुकता था। अतीक और अशरफ ने काफी प्रयास किया, लेकिन जैनब और शाइस्ता की आपस में कभी नहीं पटी।

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