फिर भी इस वजह से है बीजेपी को जीत की उम्मीद
वहीं दूसरी ओर 2 बार चेयरमैन रह चुके डॉक्टर शमीम अहमद की पुत्री सबा समीम भी इस सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में दावेदार हैं। सबा शमीम का कहना है कि मेरी प्राथमिकता नगर में पेयजल, शिक्षा, साफ सफाई और बुनकरों को बिजली को लेकर रहेगी। अगर मुझे मौका मिलता है तो मैं इन समस्याओं पर ध्यान दूंगी। वर्तमान चेयरमैन करीमुन निशा से लोगों में काफी नाराजगी है। उनका कहना है कि इनके द्वारा कोई काम नहीं किया गया। लोग उनको दोबारा मौका देने के पक्ष में नहीं हैं। महिला सीट होने के नाते शमीम अहमद की पुत्री निर्दलीय प्रत्याशी हैं और इस सीट पर मुख्य मुकाबला निर्दलीय सबा शमीम और भाजपा के संभावित प्रत्याशी मुक्तादिर व समाजवादी पार्टी के बीच होने की संभावना प्रबल है।
मुबारकपुर की मुख्य समस्या रोजगार की है। रेशमी साड़ी की बुनाई यहां का मुख्य धंधा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से यह कारोबार लगभग समाप्ति की ओर है इसलिए इस कारोबार में लगे लोग दूसरे कारोबार की तलाश में इधर उधर निकल गए हैं। जो काम में लगे हुए हैं उनके लिए बिजली के दामों में बढ़ोतरी मुख्य समस्या है। वहीं दूसरी समस्याओं में पीने का पानी, स्वास्थ्य सेवा, सीवर लाइन, सड़क जाम की समस्या मुख्य है। बनारसी साड़ियों के मार्केटिंग के लिए पिछली सरकार ने एक विपणन केंद्र की स्थापना की थी, लेकिन प्रशासनिक उपेक्षा के चलते वह भी निष्क्रिय है। वहीं पिछली सरकार ने मुबारकपुर के यातायात व्यवस्था को मजबूत करने के लिए एक बेहतरीन बस अड्डे की स्थापना की। कुछ दिनों तक तो यहां से बसों का संचालन हुआ, लेकिन धीरे-धीरे संचालन बंद कर दिया गया। अब पूरी तरह से यह बस अड्डा ठप पड़ा हुआ हैं।

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