नई दिल्ली। साल 1978 और तारीख थी 18 नवंबर. दिल्ली में बढ़ती ठंड के बीच तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने कर्नाटक के चिकमंगलूर से उपचुनाव जीतकर आई कांग्रेस नेता इंदिरा गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव पेश कर दिया। प्रस्ताव पर 7 दिन तक चली बहस के बाद इंदिरा गांधी की संसद सदस्यता रद्द कर दी गई। सदस्यता रद्द होने के बाद सदन से जब इंदिरा बाहर निकलीं तो कांग्रेसियों में जोश हाई था और नारे लगा रहे थे- एक शेरनी सौ लंगूर, चिकमंगलूर-चिकमंगलूर।
ठीक 45 साल बाद सूरत कोर्ट के एक फैसले के बाद लोकसभा सचिवालय ने राहुल गांधी की सदस्यता रद्द कर दी है। लोकसभा के मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह के हस्ताक्षर से जारी लेटर में कहा गया है कि रिप्रजेंटेशन ऑफ पीपुल्स एक्ट-1951 के धारा 102 (1)(म) के तहत सदस्यता खत्म की जाती है। राहुल को मानहानि केस में सूरत की एक अदालत ने गुरुवार को 2 साल की सजा सुनाई थी। राहुल की सदस्यता रद्द होने के बाद कांग्रेसी सड़कों पर है और डरो मत का नारे लगा रहे हैं। राहुल की सदस्यता रद्द होने पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि लोकतंत्र बचाने के लिए हम जेल जाने को भी तैयार हैं। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने एक बयान में कहा है कि अभी इंदिरा के सभी सिपाही मर नहीं गए हैं।
इमरजेंसी खत्म होने के बाद कांग्रेस के खिलाफ विपक्षी नेताओं ने एक मोर्चा बनाया था। मोर्चा का नेतृत्व जय प्रकाश नारायण कर रहे थे। 1977 के आम चुनाव में इंदिरा गांधी की करारी हार हुई। कांग्रेस पूरे देश में 154 सीटों पर सिमटकर रह गई। यूपी, बिहार, बंगाल और एमपी जैसे राज्यों में पार्टी का सूपड़ा साफ हो गया। खुद इंदिरा गांधी रायबरेली सीट से चुनाव हार गईं। उनके कई मंत्रियों को हार का सामना करना पड़ा। कांग्रेस की हार के बाद मोरारजी की सरकार बनी और इसके बाद शुरू हुआ गांधी परिवार पर कार्रवाई का दौर। 1978 में पहले संजय गांधी की गिरफ्तारी हुई और फिर इंदिरा गांधी को पुलिस ने पकड़ लिया। इसी बीच कर्नाटक के चिकमंगलूर सीट पर उपचुनाव की घोषणा हो गई। इंदिरा गांधी ने यहां से पर्चा दाखिल कर दिया।
इंदिरा के खिलाफ मैदान में उतरे थे दिग्गज समाजवादी नेता वीरेंद्र पाटिल। इंदिरा ने इस चुनाव में पाटिल को 70 हजार से ज्यादा वोटों से हराया और संसद पहुंचने में कामयाब रही। हालांकि, कुछ महीने बाद ही इंदिरा की सदस्यता रद्द कर दी गई। इसके बाद इंदिरा पूरे देश का दौरा करने लगी। बिहार से लेकर गुजरात और दक्षिण में इंदिरा की जनसभा ने कांग्रेस में जान फूंक दिया। 1980 में आंतरिक टूट के बाद जनता पार्टी की सरकार गिर गई और फिर आम चुनाव की घोषणा हुई। इंदिरा के सामने जगजीवन राम और चौधरी चरण सिंह जैसे दिग्गज नेताओं की चुनौती थी, लेकिन इंदिरा की राजनीतिक लड़ाई ने कांग्रेस की वापसी करा दी। 1980 में कांग्रेस ने 529 में 363 सीटों पर बड़ी जीत दर्ज की। चौधरी चरण सिंह की पार्टी को 41 और जनता पार्टी को 31 सीटों पर जीत मिली।

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