आजमगढ़ः गबन के आरोपी को 40 साल बाद मिली सजा...

आरोपी दीपनारायन को तीन साल के सश्रम कारावास तथा दो हजार रुपए जुर्माना

गैगेस्टर एक्ट के चार आरोपियों को मिली 8-8 साल की सश्रम कारावास की सजा


पंकज सिंह
आजमगढ़। गांधी आश्रम में गबन के लगभग चालीस साल पुराने मुकदमे में सुनवाई पूरी करने के बाद अदालत ने एक आरोपी को तीन वर्ष के सश्रम कारावास तथा दो हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। यह फैसला अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट नंबर 10 सुश्री अनीता ने सुनाया। अभियोजन कहानी के अनुसार महाराजगंज गांधी आश्रम के तहत एक उपकेंद्र में दीप नारायन पांडेय पुत्र काशी नाथ पांडेय निवासी अजोरपुर थाना केराकत जिला जौनपुर की व्यवस्थापक के पद पर नियुक्ति थी। अप्रैल 1983 से अप्रैल 1984 के वित्तीय वर्ष का लेखा जोखा तैयार करते समय जब सामानों का मिलान किया गया पाया गया कि दीपनारायन ने लगभग अठारह हजार रुपए का गबन किया है।

इस संबंध में महाराजगंज गांधी आश्रम के मुख्य प्रबंधक राम सकल सिंह ने महाराजगंज थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद आरोपी दीपनारायन के विरुद्ध चार्जशीट न्यायालय में प्रस्तुत किया। अभियोजन अधिकारी राजेंद्र गुप्ता तथा बृजेश तिवारी ने राम सकल, राम राय, जय हिंद मौर्य, दीनदयाल, श्रीधर तथा अनिल को बतौर गवाह न्यायालय में परीक्षित कराया। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने आरोपी दीपनारायन को तीन साल के सश्रम कारावास तथा दो हजार रुपए जुर्माना की सजा सुनायी।

उधर गैंगस्टर के मुकदमे में सुनवाई पूरी करने के बाद चार आरोपियों को आठ आठ साल की सश्रम कैद तथा पांच पांच हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई।यह फैसला गैंगस्टर कोर्ट के विशेष न्यायाधीश जैनेंद्र कुमार पांडेय ने शनिवार को सुनाया। अभियोजन के अनुसार फूलपुर कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक शैलेंद्र त्रिपाठी दो अगस्त 2013 को अपने क्षेत्र में गश्त पर थे। तभी उन्हें सूचना मिली कि शादाब उर्फ सुड्डू उर्फ महताब पुत्र सुल्तान, शकील पुत्र टिलठू उर्फ शब्बीर निवासी फरिहा थाना निजामाबाद, शाह आलम उर्फ कठाऊ पुत्र मोहम्मद यूनुस निवासी छांऊं थाना गंभीरपुर सिराज पुत्र जान मोहम्मद निवासी मठिया थाना सरपतहा जिला जौनपुर एक नाजायज गैंग बनाकर क्षेत्र में संगठित अपराध कर रहे हैं।

गैंग चार्ट में इन आरोपियों पर गंभीर अपराध के सात मुकदमों का जिक्र किया।अभियोजन पक्ष की तरफ से शासकीय अधिवक्ता संजय द्विवेदी ने विवेचक इंस्पेक्टर क्राइम ब्रांचआशीष मिश्रा इंस्पेक्टर शैलेंद्र त्रिपाठी, प्रवीण सिंह तथा कांस्टेबल अरुण सिंह को बतौर साक्ष्य न्यायालय में परीक्षित कराया। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने आरोपी शादाब उर्फ सुड्डू उर्फ महताब, शकील, सेराज तथा शाह आलम को आठ आठ वर्ष के सश्रम कारावास तथा पांच पांच हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई।

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