ऐसी दरिंदगी की कल्पना मात्र से कांप उठती है रूह...!
विशेष न्यायाधीश अमित प्रजापति ने इस दरिंदगी को विरल से विरलतम श्रेणी का अपराध मानते हुए दोषी सोनू को मृत्यु होने तक फांसी पर लटकाए जाने का आदेश दिया। 33 पेज के आदेश में अदालत ने कहा कि उच्च न्यायालय इलाहाबाद में मृत्युदंड की पुष्टि होने के बाद फांसी दी जाए। इस मामले में 66 दिन में इंसाफ हो गया। दरिंदे के खिलाफ पुलिस ने 28 गवाहों के बयान रिकॉर्ड किए। 32 दिन में आरोपी का डीएनए परीक्षण कराया और सीसीटीवी फुटेज व 68 पेज की केस डायरी को सबूत के आधार पर कोर्ट में जमा कराया था।
इस दरिंदगी को विरल से विरलतम श्रेणी का अपराध मानते हुए विशेष न्यायधीश अमित प्रजापति ने टिप्पणी की, कहा कि भारत जैसे देश में हिंदू धर्म में बालिका को देवी के रूप में माना जाता है और उसकी पूजा की जाती है। अभियुक्त सोनू गुप्ता हिंदू धर्म से ही संबंध रखता है। उसने अबोध बालिका के साथ दुष्कर्म कर उसकी हत्या कर दी। यह अपराध निर्मम तरीके से किया गया। उसके मुंह में डायपर ठूंसकर गला घोंटकर जान ली गई। इस दौरान बालिका ने जो महसूस किया होगा, उसकी कल्पना मात्र से रूह कांप उठती है...
उन्होंने कहा, अभियुक्त के मन में बालिका के प्रति दयाभाव उत्पन्न न होना उसकी घोर अपराधिक मनोवृत्ति को दर्शाता है। उसने लगभग साढ़े चार साल की कोमल बालिका के साथ दुष्कर्म और हत्या जैसा घृणित अपराध किया है। इसके बाद बड़ी ही चतुराई से अपराध के साक्ष्यों को मिटाने का प्रयास किया। अगर पुलिस तत्परता, सजगता और सावधानी नहीं बरतती तो उसका पकड़ा जाना मुश्किल था।

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