फर्जी इंटर्न की इस खुलासे से सीनियर डॉक्टर हैरान दिखे। फर्जी इंटर्न ने एमसीएच विंग में भी ड्यूटी की है, जहां कि गंभीर मरीज आते हैं। अब पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है। छानबीन में और सच सामने आएगा। अस्पताल के डॉक्टरों डॉ नितिन, डॉ शुभम, डॉ सौमिक डे और कृति अरोड़ा के नाम पर फर्जी इंटर्न बनकर इलाज व जांच करने वाले आरोपियों की पहचान मोहित, अभिषेक सिंह और प्रीति चौहान के रूप में हुई है।
इनमें से प्रीति चौहान इंटरमीडिएट उत्तीर्ण है। अब जीएनएम की पढ़ाई कर रही है। एमबीबीएस की पढ़ाई से दूर-दूर का नाता नहीं है, फिर भी ट्रॉमा सेंटर की इमरजेंसी में डॉक्टर बनकर ड्यूटी की है। पांच दिनों तक इमरजेंसी में रही और मरीजों को देखकर जांच के लिए पर्चा लिखकर भेजा। प्रीति ही डॉक्टर कृति की जगह ड्यूटी कर रही थी। इसी तरह दबोचे गए मोहित व अभिषेक की पढ़ाई भी सामान्य है। दोनों का एमबीबीएस की पढ़ाई से कोई वास्ता नहीं है।
बीएचयू अस्पताल में तैनात एक नर्सिंग स्टाफ को जब शक हुआ तो उसने पहले अस्पताल के सुरक्षा कार्यालय में आकर जानकारी दी। इसके बाद ही प्रॉक्टोरियल बोर्ड सक्रिय हुआ। नर्सिंग स्टाफ की मदद से ही तीनों फर्जी इंटर्न पकड़े गए। इसके बाद सभी को सुरक्षाधिकारी कार्यालय लाया गया। यहां तीनों ने एक-एक कर अपनी गलती स्वीकारी और बताया कि बस वह बेरोजगार थे, इसलिए उन्होंने ऐसा कदम उठाया।
पकड़े गए फर्जी इंटर्न ने सुरक्षाधिकारी कार्यालय में सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में बताया कि जिन लोगों की जगह वे अस्पताल में डॉक्टर बनकर सेवा दे रहे थे, उसमें से किसी से कभी मुलाकात भी नहीं हुई। बस उनके द्वारा बताई गई ड्यूटी की। भुगतान डिजिटल होता था। जो पैसा होता था, वह सीधे बैंक खाते में भेज दिया जाता था। इसके लिए पहले से ही क्यूआर कोड सहित भुगतान संबंधी अन्य जरूरी औपचारिकताएं भी ऑनलाइन ही पूरी कराई गईं थीं।

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