मुरादाबाद। जिले के भगतपुर थाने में तैनात दारोगा सुभाष चंद ने बीते 25 मई को गांव मंगावाला निवासी अहमद यार और नवाब के खिलाफ गोवध अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा था। मामले में बीते मंगलवार को नवाब की पत्नी राबिया ने एसएसपी के समक्ष एक प्रार्थना पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई थी। पीड़ित की पत्नी ने बताया कि नवाब ने एक मस्जिद की छत पर छिपकर गोकुशी करने वालों की वीडियो बनाकर पुलिस से शिकायत की थी। लेकिन, दारोगा सुभाष चंद ने नवाब के खिलाफ भी झूठा मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेज दिया था। राबिया की शिकायत की जांच एसएसपी हेमंत कुटियाल ने एसपी देहात विद्या सागर मिश्र से कराई। एसपी देहात ने भगतपुर थाने पर पहुंच कर पूरे प्रकरण की जांच की।
जांच में दारोगा सुभाष चंद की कार्यशैली संदिग्ध मिली और नवाब पर लगे आरोप गलत थे। एसएसपी ने बताया कि आरोपित झूठे पाए जाने पर सीआरपीसी की धारा 169 के तहत कोर्ट में रिपोर्ट प्रेषित की गई है। जबकि, दूसरे आरोपित अहमद यार के खिलाफ विवेचना जारी है। इसके अलावा जांच में दोषी पाए जाने पर दारोगा सुभाष चंद को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। दारोगा के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं। घटना के दिन नवाब के शोर मचाने पर गांव के अन्य लोग और पूर्व प्रधान नाजिर अली भी आ गए थे। तब आरोपित गाय छोड़कर भाग निकले।
सूचना मिलने पर दारोगा सुभाष कुमार, एक अन्य दारोगा और दो सिपाहियों के साथ मौके पर पहुंचे और उन्होंने लोगों से पूछताछ की। तब पता चला कि ये गाय राजपाल ने बीस दिन पहले अहमद यार को बेची थी। पुलिस ने अहमद यार को हिरासत में ले लिया था। उसने भी किसी अन्य व्यक्ति को गाय बेचने की बात कही थी। पुलिस राजपाल, अहमद यार को थाने ले गई। कुछ देर बाद दारोगा ने पूर्व प्रधान को काल कर नवाब को भी थाने बुला लिया था। नवाब मना करता रहा। उसने खुद को बेगुनाह बताया लेकिन, दारोगा ने उनकी एक नहीं सुनी।
.jpg)
0 Comments