प्रयागराज। सांसद-विधायक निधि का किस तरह से दुरुपयोग हो रहा है, इसका ताजा प्रकरण प्रयागराज के सराय ममरेज क्षेत्र के एक इंटर कालेज में पकड़ा गया। बसपा नेता के रामधनी दिवाकर ग्राम विकास एवं शिक्षण संस्थान में सात कमरे के निर्माण के लिए बिहार से राज्यसभा सदस्य रहे अनिल कुमार साहनी और उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सदस्य रहे विशंभर प्रसाद ने 10-10 लाख रुपये अपनी निधि से देने की स्वीकृति दी। इसमें छह-छह लाख रुपये कालेज संचालक को दे दिए गए। दूसरी किश्त में दोनों सांसदों की निधि से जब चार-चार लाख रुपये की कालेज प्रबंधन की ओर से मांग की गई तो पहली किश्त से हुए काम की स्टेटस रिपोर्ट मांगी गई।
डीडीओ अशोक कुमार मौर्य ने बताया कि इसमें भी फर्जीवाड़ा किया गया। दूसरी किश्त के आठ लाख रुपये के लिए फर्जी तरह से दोनों सांसदों का शिलापट प्रथम तल पर पहले से निर्मित कमरों में लगा दिया गया, जिससे यह पता चल सके कि दोनों सांसदों से मिली राशि से कमरे बन गए हैैं, जबकि ये धनराशि द्वितीय तल पर सात कमरे के लिए दी गई थी। पूरे मामले में मुख्य सचिव के निर्देश पर मंडलायुक्त ने उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित की। डीडीओ समेत कई अधिकारी मौके पर जांच को पहुंचे तो यह फर्जीवाड़ा पकड़ा गया।
अब कालेज प्रबंधन को नोटिस भेजा गया है। मुकदमा भी दर्ज कराने के निर्देश हो गए हैैं। आरसी जारी कराकर धनराशि की वसूली करने के निर्देश दिए गए हैैं। कालेज को ब्लैक लिस्ट कर दिया गया है जिससे अब इस कालेज को इस तरह से सहायता नहीं मिल सकेगी। इसके अलावा इस मामले से संबंधित विकास भवन के तत्कालीन एक जिला स्तरीय अधिकारी व दो कर्मचारियों से स्पष्टीकरण तलब किया गया है। मामले में निधि से धन देने वाले तत्कालीन सांसदों को पत्राचार किया जा रहा है।

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