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आजमगढ़। आजमगढ़ लोकसभा उपचुनाव अब दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। यहां समाजवार्दी पार्टी ने पूर्व सांसद धर्मेद्र यादव को प्रत्याशी बनाया है तो भाजपा ने एक बार फिर भोजपुरी सिनेस्टार दिनेश लाल यादव निरहुआ पर भरोसा जताया है। वहीं बहुजन समाज पार्टी ने अपने पूर्व विधायक शाह आलम गुडडु को उम्मीदवार बनाया है। इस सीट पर सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव व अखिलेश यादव ने जीत दर्ज किया है। इस बार भी सपा इस सीट को जीतने की प्रबल जिम्मेदारी है तो पिछली बार बड़े अंतर से हारी भाजपा जीतने को बेताब दिख रही है। वहीं शून्य की ओर चली गई बसपा दलित-मुस्लिम गठजोड़ के दम पर जीत दर्ज कर पूरे प्रदेश में पार्टी को संजीवनी मिलने की सपना देख रही है।
आजमगढ़ समाजवार्दी पार्टी का गढ़ माना जाता है। पिछले विधान सभा चुनाव में जहां पूरे प्रदेश में योगी बाबा के बुलडोजर की धमक चल रही थी तो आजमगढ़ में सपा ने दस विधानसभा सीटों पर समाजवार्दी पताका लहराया था। सपा प्रमुख अखिलेश यादव के मैनपुरी के करहल सीट से विधान सभा का चुनाव जीतने के बाद आजमगढ़ की लोकसभा सीट से इस्तीफा दे दिया था। जिसके कारण आजमगढ़ लोकसभा सीट पर उपचुनाव हो रहा है। इस चुनाव में समाजवार्दी पार्टी ने औपचारिक रूप से दलित नेता पूर्व सांसद बलिहारी बाबू के बेटे सुशील आनन्द को प्रत्याशी बनाया तो राजनैतिक गलियारों में चर्चा आम हो गई कि सपा ने अपने परिवार के किसी सदस्य को टिकट न देकर परिवारवाद की मुहर से बाहर निकला चाहा है साथ ही यादव समुदाय से प्रत्याशी न बना कर एक दलित को टिकट देकर लोहिया-अंबेडकर गठजोड़ का संदेश दिया है। लेकिन नामांकन के अंतिम दिन धर्मेद्र यादव को प्रत्याशी बना कर सपा परिवारवाद के परिपाटी से बाहर नहीं निकल पाई। तर्क सपा इस सीट को हर हाल में जीतना चाह रही है।
आजमगढ़ लोकसभा सीट पर 1952 से लेकर 1971 तक 5 बार कांग्रेस, 4 बार बहुजन समाज पार्टी और तीन बार समाजवादी पार्टी ने जीत दर्ज किया है। एक अनुमान के तहत आजमगढ़ में 19 लाख वोटर हैं। साढ़े तीन लाख से ज्यादा यादव वोटर हैं। तीन लाख के करीब मुसलमान वोट और तीन लाख ही दलित वोटरों की संख्या है। पिछले लोक सभा में भाजपा के प्रत्याशी दिनेश लाल यादव निरहुआ को 3.61 लाख से ज्यादा वोट मिले थे। तब सपा प्रमुख अखिलेश यादव से 2.59 लाख वोटों से जीत दर्ज किया था। उस समय समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के गठबंधन के साथ लड़ा गया था। लेकिन इस बार ऐसा नहीं है।
2014 के लोकसभा चुनाव में मुलायम सिंह यादव अपने निकटतम प्रतिद्वंदी भाजपा के रमाकांत यादव से तकरीबन 64 हजार वोटों से ही जीते थे। 2014 के लोकसभा चुनावों में मुलायम सिंह यादव को 340306 वोट मिले थे, जबकि भाजपा के रमाकांत यादव को 277102 वोट मिले थे। बसपा के शाह आलम गुड्डू जमाली को 266528 मत पाकर तीसरे नंबर पर रहे थे। वहीं 2019 के निकटतम प्रतिद्वंदी दिनेश लाल यादव निरहुआ मजबूती के साथ मैदान में चुनाव लड़ रहे हैं। राजनैतिक प्रेक्षकों का मानना है कि आजमगढ़ का उपचुनाव उतना आसान नहीं है जितना कि समझा जाता रहा है। इस बार मामला न सिर्फ त्रिकोणात्मक है बल्कि सपा को अपनी साख बचाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

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